सूरज तो आज भी चमकता है : कविता

रणजोध सिंह – नालागढ़ हमने तमाम रौशनी को ढक दिया कंक्रीट के जंगल से वगरना दोस्त, सूरज तो सूरज है आज भी चमकता है| ये जो हर तरफ अफ़रा-तफ़री है अपनी ही करनी का फल है झूठ की बैसाखियों पर चलने वाला दिन में कई बार मरता है| उसने अपनी जवानी लगा दी अपने घर … Continue reading सूरज तो आज भी चमकता है : कविता