एकह पहचान – डॉ. कमल के. प्यासा
डॉ. कमल के. प्यासा – मंडी कुण हा, हाऊं….? केथी हा…. किहाँ हा….? फेर भी तुसा से परोखे हा हाऊं….,!….. पर मुंझों किछ थोग पता नी…..! मेरी पक्की परख, हाडकुआ रे कोठरु मँझ बंद : एकह जियूँदा हांडदा फिरी रा, धूड़ फाकदा माणू,…..! भटकदा इथखा उथखा तेथी, जेथीं माणू, माणू जो नी जाणदा. मेरे हाथा … Continue reading एकह पहचान – डॉ. कमल के. प्यासा
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