ग़ज़ल – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह – नालागढ़ मुझे जख्म देने वाले जाने पहचाने हैं फूल के दर्द से भक्त लोग अनजाने हैं|   वो बीच बाजार रोंद देता है मासूम कलियों को हमें बना वीडियो अपने फर्ज निभाने हैं|   झूठ चढ़कर छाती पर किस्मत लिख जाता है सच को पकड़े रहते हैं जो हम जैसे दीवाने हैं| … Continue reading ग़ज़ल – रणजोध सिंह