इंसानियत, कविता – डॉ. कमल के प्यासा

डॉ. कमल के प्यासा – मण्डी कभी धूप कभी छाँव ,, कभी ढले शाम कभी उजियारा चलता रहे काम कभी रहे आराम, जीवन का है दर्शन यही या कह लो इसे ज्ञान,,! कभी धूप कभी छाँव,, चले कोई किधर मत हो; परेशान,,! अपनी अपनी डगर अपनी मंज़िल फिर क्यों हैरान,,? जिंदगी की यही पहचान है … Continue reading इंसानियत, कविता – डॉ. कमल के प्यासा