इंसानियत, कविता – डॉ. कमल के प्यासा

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डॉ. कमल के प्यासा – मण्डी

कभी धूप

कभी छाँव ,,

कभी ढले शाम

कभी उजियारा

चलता रहे काम

कभी रहे आराम,

जीवन का है दर्शन यही

या कह लो इसे ज्ञान,,!

कभी धूप

कभी छाँव,,

चले कोई किधर

मत हो; परेशान,,!

अपनी अपनी डगर

अपनी मंज़िल

फिर क्यों हैरान,,?

जिंदगी की यही पहचान

है जिंदा दिली इसका नाम

कभी धूप

कभी छाँव,,,

चले चल

चले चल

आगे बढ़ना तेरा काम

तू है मानव ‘उसका’

इंसानियत तेरा मुकाम

कभी धूप

कभी छाँव…

हिमाचल: मंडी क्षेत्र के अभिलेखीय प्राचीन सिक्के, भाग 4

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

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