जड़ों का दर्द – (कविता) – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह  – नालागढ़ महकते हुए हसीं गुल ने अपनी जड़ों से पूछा, तुम्हारा वजूद क्या है? जवां बेटे ने अपने बुड़े बाप से पूछा, आपने मेरे लिए किया क्या है?   दरिया ने मिटा दिया खुद को समंदर के लिए, समंदर दरिया से बोला मेरे सामने तेरी क़ीमत क्या है| वो जो ब-अदब आया … Continue reading जड़ों का दर्द – (कविता) – रणजोध सिंह