प्रो. रणजोध सिंह – नालागढ़ प्रो. देवेंद्र सिंह अपनी कार में सपत्नीक मुकेश कुमार के मधुर गीत सुनते हुए अपने पुश्तैनी गांव जा रहे थे। गांव अभी चार-पांच किलोमीटर दूर था, कि अचानक उन्होंने गाड़ी को ब्रेक लगा दी। सड़क के किनारे एक नौजवान जो शायद कभी उनका विद्यार्थी रहा था, दर्द से कराह रहा … Continue reading जीना इसी का नाम है : लघु कथा
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