सायर या सैर – डॉ. कमल के. प्यासा
डॉ. कमल के. प्यासा – मण्डी हमारे मेले, तीज और त्योहार आदि सभी हमारी संस्कृति के ही प्रतीक हैं। इन्हीं से हमें अपनी प्राचीन मान्यताओं, परंपराओं आदि की जानकारी के साथ ही साथ सामाजिक व्यवहार व परिस्थितियों का भी पता चलता है। तभी तो हम इन्हें अपनी सांस्कृतिक धरोहर भी कहते हैं। देव भूमि होने … Continue reading सायर या सैर – डॉ. कमल के. प्यासा
Copy and paste this URL into your WordPress site to embed
Copy and paste this code into your site to embed