टूरिज़्म या टेरोरिज़्म ? — रवींद्र कुमार शर्मा

टूरिज़्म या टेरोरिज़्म क्यों बदल रही है सबकी सोच,ज़माना बदला तो मकसद भी है कुछ और।घूमने की आड़ में मचाते हैं शोर,अशांति फैलाना ही है इनका जोर। बाइकों पर झंडे, रफ्तार बेहिसाब,ट्रैफिक नियमों की उड़ाते हैं किताब।रोकने पर दिखाते हैं रौब-दबदबा,बात-बात पर करते हैं झगड़ा-फसाद। कुछ अवांछित तत्व बिगाड़ रहे नाम,पर्वतों की शांति को कर … Continue reading टूरिज़्म या टेरोरिज़्म ? — रवींद्र कुमार शर्मा