पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने विधान सभा में स्वास्थ्य के स्थगन प्रस्ताव पर बोलने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि दुर्लभ कैंसर के मरीजों के इलाज को मुख्यमंत्री द्वारा “पुरुषों की बच्चेदानी निकालने” जैसे बयान के रूप में पेश करना निंदनीय और शर्मनाक है। ठाकुर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री अपने पद की गंभीरता को समझे बिना, चौक-चौराहों में दिए जाने वाले बयान की तरह गंभीर मामलों पर बयान दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जिन मामलों का मुख्यमंत्री हवाला दे रहे हैं, उनमें किसी मरीज का ऑपरेशन नहीं हुआ। चार मरीजों को केवल हिम केयर के पैकेज एम 003 के तहत ‘सीटी फॉर सीए ओवरी’ कांबिनेशन दवा – “लाइपो डॉक्स और कार्बोप्लैटिन” – के जरिए उपचार दिया गया। इन चारों मरीजों में एक 71 वर्षीय बुजुर्ग और एक 12 वर्षीय बच्चा शामिल थे, जबकि अन्य दो पुरुष 50 और 37 वर्ष के हैं। कुल खर्च 67,800 रुपए आया, लेकिन किसी की बच्चेदानी नहीं निकाली गई। ठाकुर ने कहा कि ईश्वर की कृपा से सभी मरीज स्वस्थ हैं और उन्हें नया जीवन मिला।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह दवा संयोजन लंग्स कैंसर, यूरिनरी ब्लैडर कैंसर, टेस्टिकुलर कैंसर, एड्स से संबंधित सारकोमा, मेल ब्रेस्ट कैंसर, हार्मोन रिफ्रेक्टरी प्रोस्टेट कैंसर, सिर और गर्दन के कैंसर में भी इस्तेमाल होती है। दुर्लभ कैंसर के लिए स्पष्ट मेडिकल प्रोटोकॉल न होने के कारण डॉक्टरों ने हिम केयर और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं में उपलब्ध पैकेज का इस्तेमाल कर इलाज सुनिश्चित किया। ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा अफवाह फैलाना और योजना को बदनाम करना राजनीतिक और गैर-जिम्मेदाराना है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री सदन और जनता से माफी मांगे, क्योंकि यह बयान पूरी तरह विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में हुए इलाज के खिलाफ है।



