पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) को लेकर लोगों को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार झूठ और साजिश के सहारे राजनीति कर रही है, जिससे प्रदेश के हित प्रभावित हो रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि वीबी-जी राम जी योजना का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। उनके अनुसार, इस योजना में सरकार की जवाबदेही तय करने, रोजगार की पारदर्शिता बढ़ाने, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, रोजगार के अधिकार को मजबूत करने तथा रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार ने निर्माण कार्यों में अपनी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दी है, जिससे हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्यों को विशेष लाभ मिलेगा। इसके अलावा, कार्यस्थल पर दुर्घटना की स्थिति में प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ, 15 दिन के भीतर भुगतान नहीं होने पर ब्याज सहित भुगतान तथा रोजगार उपलब्ध न होने पर भत्ता देने का भी प्रावधान किया गया है। प्रशासनिक व्यय की सीमा भी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दी गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार के उस दावे को भी खारिज किया कि नई व्यवस्था में मनरेगा मजदूरी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि वीबी-जी राम जी अधिनियम की धारा 10 में स्पष्ट उल्लेख है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय किसी भी स्थिति में मनरेगा की मजदूरी से कम नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि योजना में आपदा राहत और आपदा न्यूनीकरण से जुड़े कार्यों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनका लाभ हिमाचल जैसे आपदा प्रभावित राज्य को मिल सकता है। उनका आरोप था कि राज्य सरकार राजनीतिक कारणों से योजना का विरोध कर रही है, जबकि उसे प्रदेश के हित में इसका अधिकतम लाभ उठाना चाहिए।
जयराम ठाकुर ने कहा कि 1 जुलाई से लागू होने जा रही वीबी-जी राम जी योजना का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार योजना के सकारात्मक प्रावधानों को नजरअंदाज कर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।



