पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शिमला में जारी एक बयान में राज्य की कांग्रेस सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के गलत, अव्यवहारिक और मनमाने फैसलों के कारण आज समाज का हर वर्ग परेशान है। जयराम ठाकुर ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली बागवानी—तीनों ही क्षेत्र सुक्खू सरकार की प्रशासनिक विफलता और लापरवाही के कारण गहरे संकट में हैं।
स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर चिंता जताते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मरीजों को आयुष्मान भारत और हिमकेयर जैसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद हो गया है। सरकारी सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में प्रोस्टेट कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के टीके तक उपलब्ध नहीं हैं। सिविल सप्लाई की दुकानों का बकाया भुगतान न होने और बारकोड संबंधी तकनीकी खामियों के कारण गरीब मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाइयां खरीदने और निजी क्लीनिकों में महंगे टेस्ट कराने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
शिक्षा और बागवानी क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) सहित अन्य संस्थानों में की गई भारी फीस वृद्धि के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन और भूख हड़ताल करने को मजबूर हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य की 5,500 करोड़ रुपये की सेब अर्थव्यवस्था को सरकार के नए नियमों और बंदिशों ने प्रभावित किया है। बागवानों को मनमाने दाम की गारंटी देकर सत्ता में आई सरकार अब सेब बेचने पर उन्हें नोटिस थमा रही है और एमआईएस के तहत बकाया 80 करोड़ रुपये का भुगतान भी अटका हुआ है। पैकिंग के लिए बोरियों की खरीदारी पर 30 बैग की सीमा तय करने से बागवानों के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने ये तानाशाही फैसले वापस नहीं लिए, तो पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन किया जाएगा और भाजपा इन मुद्दों को विधानसभा में भी प्रमुखता से उठाएगी।
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