विधानसभा सत्र के समापन के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार में पूरी तरह अफरा-तफरी का माहौल है और चुनावी वर्ष की आहट से अधिकारियों में भी खलबली मची हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने मानसून सत्र के दौरान जनहित के मुद्दे गंभीरता से उठाए, लेकिन सरकार की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मुख्यमंत्री के दिल्ली जाते ही सत्र की गंभीरता खत्म हो गई और अधिकारी दीर्घा पूरी तरह खाली नजर आई, जिससे प्रशासनिक सुस्ती साफ उजागर होती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व में लाए गए कई बड़े विधेयकों को हाईकोर्ट द्वारा निरस्त किया जाना सरकार की विफलता का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा के बाद करोड़ों रुपये की वन संपदा का अवैध खनन हुआ, जिससे राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा। जयराम ठाकुर ने सरकार को रोजगार, कर्ज और बंद पड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं पर घेरते हुए कहा कि आज प्रदेश पर 1.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है, लेकिन धरातल पर विकास शून्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत भाजपा विधायकों के खिलाफ दर्ज मामलों की सरकार बदलने पर निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।



