पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर सहारा पेंशन योजना और विभिन्न सेवाओं में बढ़ते शुल्क को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिमला से जारी बयान में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर केवल ब्रांडिंग पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर जनहित योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार द्वारा शुरू की गई सहारा पेंशन योजना, जो गंभीर रूप से असहाय और शारीरिक रूप से पूर्णतः अक्षम लोगों के लिए थी, आज लगभग ठप हो चुकी है। उनके अनुसार, इस योजना से पहले 30,000 से अधिक लाभार्थी जुड़े हुए थे, लेकिन अब कई मामलों में महीनों से पेंशन बंद है।
उन्होंने कहा कि चिंताजनक बात यह है कि कई लाभार्थियों को “मृत घोषित” कर उनकी पेंशन रोक दी गई है। उन्होंने इसे सरकार की “संवेदनहीनता और बेशर्मी” करार देते हुए कहा कि ऐसे लोग, जो स्वयं चल-फिर भी नहीं सकते, उनसे जीवित होने का प्रमाण मांगना अमानवीय है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सहारा पेंशन जैसे मामलों में सरकार को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और सत्यापन की जिम्मेदारी स्वयं निभानी चाहिए, न कि अक्षम लोगों पर इसका बोझ डाला जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार “बर्डन ऑफ प्रूफ” लाभार्थियों पर डालकर अपनी जिम्मेदारी से बच रही है।
इसके साथ ही जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर “शुल्क की सरकार” बनने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि अस्पतालों से लेकर पर्यटन निगम के होटलों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं तक शुल्क में लगातार वृद्धि की जा रही है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि अस्पतालों में बेड चार्ज, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी, ऑपरेशन, आईसीयू, एनेस्थीसिया, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और अन्य चिकित्सा सेवाओं के शुल्क बढ़ा दिए गए हैं। इसके अलावा सर्किट हाउस और अन्य सुविधाओं के शुल्क में भी वृद्धि की गई है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि “सुख की सरकार” के नाम पर चल रही यह व्यवस्था अब आम लोगों के लिए “शुल्क की सरकार” बनती जा रही है, जो प्रदेशवासियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।



