सरकार के फैसलों पर नेता प्रतिपक्ष का हमला

Date:

Share post:

पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि तीन साल का कार्यकाल बीत जाने के बाद भी सरकार अपने पहले बजट की कई घोषणाओं को जमीन पर नहीं उतार पाई है। उन्होंने कहा कि कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित हैं और सरकार हर बजट में उन्हीं घोषणाओं को दोहराती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी भाषण और बजट घोषणाओं के बीच अंतर नहीं समझती। बजट में जिन योजनाओं के लिए प्रावधान किया जाता है, उन्हें लागू करना सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन वर्तमान सरकार की कई घोषणाएं अभी तक अधूरी हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से चौथा बजट पेश करने से पहले पिछले तीन बजट की अधूरी घोषणाओं का जवाब देने की मांग की।

जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने छात्राओं को विद्युत चालित स्कूटी पर अनुदान, छह हरित मार्ग, हर विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान और चंबा, नाहन व हमीरपुर में पॉज़िट्रॉन उत्सर्जन टोमोग्राफी स्कैन (पीईटी स्कैन) सुविधा जैसी कई घोषणाएं की थीं, लेकिन इनमें से अधिकांश योजनाएं अभी तक शुरू नहीं हो सकीं। किसानों, बागवानों, महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार से जुड़ी घोषणाएं भी कागजों तक सीमित हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने पहले वर्ष में 63,712 करोड़ रुपये, दूसरे वर्ष में 75,496 करोड़ रुपये और तीसरे वर्ष में 58,343 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस प्रकार तीन वर्षों में लगभग 2.2 लाख करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया, जबकि इस दौरान 45,000 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण भी लिया गया।

उन्होंने सवाल उठाया कि इतने बड़े बजट और भारी ऋण के बावजूद यदि योजनाएं शुरू नहीं हो सकीं, तो यह सरकार की नीति और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि जिन योजनाओं के लिए बजट में धन का प्रावधान किया गया था, वह धन आखिर खर्च क्यों नहीं हुआ।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार के उस फैसले का भी विरोध किया, जिसमें राज्य सतर्कता विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर करने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि इन संस्थाओं का गठन भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए किया गया था, लेकिन उन्हें सूचना के अधिकार से बाहर करना पारदर्शिता को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 24 के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों को भी भ्रष्टाचार और मानवाधिकार हनन के मामलों में सूचना देनी होती है, इसलिए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि उसका यह निर्णय कानून के दायरे में कैसे है।

जयराम ठाकुर ने प्रदेश में वाहनों पर प्रवेश कर बढ़ाने के फैसले की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस निर्णय का असर सीमावर्ती जिलों के लोगों और पर्यटन उद्योग पर पड़ेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।

टीबी मरीजों को पोषण किट वितरण पूरा : उपायुक्त

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Related articles

चाहत, कविता – रणजोध सिंह

रणजोध सिंह - नालागढ़ वैसे तो मैं भी सच बोलना चाहता हूँ मगर मुश्किल ये है, जिंदा भी रहना चाहता हूँ! ये पत्थरों...

शिमला: चुनाव लापरवाही पर सख्त कार्रवाई, 4 अधिकारी सस्पेंड

पंचायत राज चुनावों के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आने पर जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत) एवं उपायुक्त शिमला अनुपम...

BJP Slams Govt Over Chief Secretary Regularisation

Former Chief Minister and Leader of Opposition Jai Ram Thakur on Tuesday launched a sharp offensive against the...

HPBOSE Sets June Schedule for Class 10, 12 Exams

The Himachal Pradesh Board of School Education (HPBOSE) will conduct supplementary and improvement examinations for Classes 10 and...