उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में शिमला जिले में टीबी उन्मूलन अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार जिले में टीबी पहचान, जांच और इलाज में तय लक्ष्यों से बेहतर प्रदर्शन किया गया है। निर्धारित 24,408 के लक्ष्य के मुकाबले 28,008 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई, जो 115 प्रतिशत उपलब्धि है। इसके अलावा, 1,393 टीबी मरीजों को नोटिफाई कर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया। मरीजों के एचआईवी और ब्लड शुगर स्टेटस की जांच में 98 प्रतिशत सफलता मिली, जबकि 92 प्रतिशत मरीजों का इलाज सफलतापूर्वक पूरा हुआ।
अभियान को निचले स्तर तक प्रभावी बनाने के लिए नए पंचायत प्रतिनिधियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही एनसीसी और एनएसएस के छात्र-छात्राओं को जन-जागरूकता अभियानों से जोड़ा जाएगा ताकि हर गांव में टीबी के लक्षणों और इसके इलाज के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निक्षय पोषण योजना के तहत 766 लाभार्थियों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है। बैठक में सीएमओ डॉ. यशपाल रांटा सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच जिले में कुल 674 टीबी मरीजों में से 28 की मृत्यु दर्ज की गई, जिससे कुल मृत्यु दर 4 प्रतिशत रही। शिमला शहरी क्षेत्र में सबसे अधिक 11 मौतें हुईं, जबकि मशोबरा में 5 और रामपुर में 4 मरीजों की मृत्यु हुई। राहत की बात यह रही कि सुन्नी में 15 और टिक्कर में 47 टीबी मरीजों में से किसी की भी मृत्यु नहीं हुई। प्रशासन ने सभी नागरिकों से टीबी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने और पूरा इलाज लेने की अपील की है।
वर्ष 2025 के प्रदर्शन के आधार पर शिमला जिले की 412 में से 141 ग्राम पंचायतें (34 प्रतिशत) टीबी मुक्त घोषित की जा चुकी हैं। इस सूची में रोहड़ू विकासखंड 19 पंचायतों के साथ सबसे आगे रहा, जिसके बाद ठियोग की 24 और बसंतपुर की 14 पंचायतें शामिल हैं। इन पंचायतों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के आधार पर तीन श्रेणियों—23 को गोल्ड, 34 को सिल्वर और 84 पंचायतों को ब्रॉन्ज श्रेणी में सम्मानित किया गया है।
Folk Beats and Big Lessons Take Over the Auckland House School Stage


