राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज ओडिशा के ऐतिहासिक रेवेनशॉ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और शिक्षा, नवाचार व महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में इसके योगदान की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय को स्वतंत्रता संग्राम, ओडिशा राज्य गठन आंदोलन और सामाजिक सुधारों से जुड़े एक प्रेरणादायक संस्थान के रूप में वर्णित किया।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि रेवेनशॉ विश्वविद्यालय अनुसंधान, नवाचार और समावेशिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। ‘डिज़ाइन, नवाचार और उद्यमिता केंद्र’ जैसे पहल छात्रों को विचार-मंथन, अनुसंधान और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ रहे हैं। उन्होंने आदिवासी, वंचित और दिव्यांगजन छात्रों की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना की।
तकनीकी युग की चर्चा करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, थ्री-डी प्रिंटिंग और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे तकनीकी बदलावों को अपनाने में विश्वविद्यालय की भूमिका की प्रशंसा की और इनके दुरुपयोग से सतर्क रहने की सलाह दी।
राष्ट्रपति ने छात्रों को अमृत काल के महत्व की याद दिलाते हुए 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण से योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रथम की भावना ही देश की सबसे बड़ी ताकत है।
इसके पश्चात एक अन्य कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने कटक स्थित रेवेनशॉ गर्ल्स हाई स्कूल की तीन इमारतों के जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया। उन्होंने इस परियोजना को बालिका शिक्षा के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया और केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना की।
राष्ट्रपति ने बालिकाओं की सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि समान अवसर मिलने पर वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं। उन्होंने छात्राओं से देश की प्रेरणादायी महिलाओं से सीखने और अपने आत्मविश्वास, ज्ञान व संकल्प से असंभव को संभव करने की प्रेरणा ली।