विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर परवाणू में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भारत विभाजन को “मानवता के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी” करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत की आज़ादी के साथ जो विभाजन हुआ, वह केवल एक भू-राजनीतिक रेखा नहीं थी, बल्कि एक गहरा मानवीय घाव था, जिसने लाखों परिवारों को उजाड़ दिया।
कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कांग्रेस पर भारत विभाजन की ज़िम्मेदारी डालते हुए कहा कि तत्कालीन नेतृत्व की गलतियों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते देश को विभाजन की भयंकर कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर पाकिस्तान का गठन एक ऐतिहासिक भूल थी, जिसका परिणाम 15-20 लाख मौतें और करोड़ों लोगों का विस्थापन रहा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को मनाने का निर्णय एक साहसिक कदम है, जो हमें अपने इतिहास से सीखने और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देता है। यह दिन हमें सामाजिक विभाजन और वैमनस्यता से ऊपर उठकर, एकता और मानवता की भावना को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
जयराम ठाकुर ने कहा, “हम आज़ादी का पर्व मनाते हैं, लेकिन बंटवारे का दर्द अब भी हिंदुस्तान के सीने को छलनी करता है। यह विभाजन सिर्फ सरहदों का नहीं, बल्कि संस्कृति, सभ्यता और आत्मा का भी था।”
इस अवसर पर पूर्व मंत्री डॉ. राजीव सहजल, पूर्व विधायक के.एल. ठाकुर, लखविंदर राणा, परमजीत पम्मी, डेज़ी ठाकुर सहित कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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