यूजीसी-नेट में पांगी घाटी की शानदार उपलब्धि

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चंबा जिले की जनजातीय और दुर्गम पांगी घाटी आमतौर पर बर्फबारी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जानी जाती है, लेकिन इस बार यह क्षेत्र अपने प्रतिभाशाली युवाओं की उपलब्धियों को लेकर चर्चा में है। सुविधाओं की कमी के बावजूद पांगी के युवाओं ने साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है।

ग्राम पंचायत करयास के झलवास गांव निवासी अनिल कुमार ने अपने पहले ही प्रयास में देश की प्रतिष्ठित यूजीसी-नेट परीक्षा उत्तीर्ण कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उनके पिता चंद्रमणी मनरेगा में दिहाड़ी मजदूर हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद अनिल ने हार नहीं मानी और गांव के स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने सरकारी कॉलेज पांगी से स्नातक किया।

अनिल न केवल अपनी सफलता से, बल्कि अपने बड़े सपनों से भी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं। वे भविष्य में वैज्ञानिक बनकर ऐसी शोध करना चाहते हैं, जिससे गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों का जीवन बेहतर हो सके। उनका मानना है कि स्पष्ट लक्ष्य और निरंतर मेहनत से कोई भी मंज़िल हासिल की जा सकती है।

पांगी घाटी की बेटियां भी इस उपलब्धि में पीछे नहीं रहीं। हुडान गांव की अदिति ने भी यूजीसी-नेट परीक्षा पास कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अदिति के पिता संगत राम एक साधारण किसान हैं। उन्होंने जमा दो तक की पढ़ाई किलाड़ स्कूल से और कॉलेज की पढ़ाई पांगी से की। इसके बाद अदिति ने धर्मशाला की लाइब्रेरी में दो वर्षों तक कठिन परिश्रम कर यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के सहयोग और कड़ी मेहनत को दिया।

इन दोनों युवाओं की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी सुविधा की मोहताज नहीं होती। पांगी घाटी के ये होनहार युवा आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।

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