आरडीजी को लेकर सत्ता–विपक्ष आमने-सामने

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हिमाचल प्रदेश में आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा का “हिमाचल विरोधी चेहरा” उजागर हो चुका है और इसी वजह से वह बौखलाई हुई है।

मंत्रियों ने कहा कि भाजपा पहले पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग के समक्ष प्रदेश की सीमित आर्थिक स्थिति और भौगोलिक चुनौतियों का हवाला देकर आरडीजी की जोरदार वकालत करती थी, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कुछ ही महीनों में भाजपा का दृष्टिकोण क्यों बदल गया और क्या वह अब आरडीजी बंद करने के पक्ष में है?

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का विरोध करते-करते भाजपा प्रदेश हित भूल चुकी है। केंद्रीय योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि को आर्थिक मदद बताना भ्रामक है, क्योंकि वह प्रदेश की जनता का अधिकार है।

मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, जिसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में है। उन्होंने याद दिलाया कि जय राम ठाकुर के कार्यकाल में प्रदेश को 56 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 14 हजार करोड़ रुपये जीएसटी क्षतिपूर्ति मिली थी, तब इस पर कोई आपत्ति नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र में नियम 102 के तहत आरडीजी बहाली के सरकारी प्रस्ताव और आपदा प्रभावितों को विशेष सहायता देने के प्रस्ताव का विरोध कर भाजपा ने अपना असली रुख स्पष्ट कर दिया है।

शिमला क्लब–खेल परिसर रोड 1 मार्च तक बंद

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