जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) ट्रस्ट की बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
उपायुक्त ने बताया कि ट्रस्ट को अब तक 67 लाख 91 हजार 739 रुपये की लागत के कुल 19 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने सभी प्रस्तावों पर पुनर्विचार करते हुए अनिवार्य रूप से फील्ड वेरिफिकेशन करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 तक ट्रस्ट के पास 2 करोड़ 84 लाख रुपये की राशि एकत्रित हो चुकी है।
उपायुक्त ने कहा कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के कल्याण और विकास के लिए किया गया है। यह व्यवस्था भारत सरकार द्वारा खनिज और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2015 के तहत प्रत्येक खनन जिले में लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल में माइनिंग प्रभावित क्षेत्र का दायरा बढ़ाया है। अब जहां खनन गतिविधियां होती हैं, वहां से 15 किलोमीटर तक का क्षेत्र प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित माना जाएगा, जबकि पहले यह सीमा 5 किलोमीटर थी। इसके अलावा 15 से 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित क्षेत्र माना गया है।
डीएमएफ फंड का उपयोग इन क्षेत्रों में पेयजल, सिंचाई, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और आजीविका विकास जैसी योजनाओं पर किया जाता है। इसके तहत खनन प्रभावित गांवों में स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का विकास, पेयजल योजनाएं, वृक्षारोपण, कौशल विकास प्रशिक्षण तथा जरूरतमंद परिवारों की सहायता जैसे कार्य किए जाते हैं।
उपायुक्त ने कहा कि डीएमएफ ट्रस्ट के लिए धनराशि मुख्य रूप से खनन कंपनियों और खनन पट्टाधारकों के योगदान से एकत्रित की जाती है, जिसे जिला स्तर पर विकास कार्यों में खर्च किया जाता है।



