हिमाचल : लेख/अभिलेखों वाले प्राचीन सिक्के (विशेष रूप से मण्डी क्षेत्र से प्राप्त) – डॉ. कमल के. प्यासा

Date:

Share post:

डॉ. कमल के. प्यासा – मण्डी

ताम्र पट्ट अभिलेखों के पश्चात हिमाचल से प्राप्त होने वाले सिक्कों से मिलने वाले लेखों व अभिलेखों के बारे भी बहुत कुछ जानकारी प्राप्त कर लेते हैं:

प्राचीन सिक्कों से भी कई तरह की ऐतिहासिक जानकारियां प्राप्त होती हैं, इसी लिए ये भी एक ऐतिहासिक स्रोत के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं। तो चलते हैं और देखते है प्रदेश से प्राप्त होने वाले सिक्कों के संबंध में।हिमाचल से प्राप्त हुवे सिक्कों की जानकारी इस प्रकार से प्रस्तुत की जा रही है, इसमें सिक्कों के संबंध में रहेगा, उसका निर्माण पदार्थ अर्थात धातु, काल, आकर, प्रकार, भार, लिखी लिपि, पंजीकरण संख्या, प्राप्ति स्थान व विवरण आदि ।

जिले अनुसार प्राप्त सिक्कों की जानकारी ।

मण्डी क्षेत्र से प्राप्त सिक्के:

कुषाण कालीन:_

1.सिक्के की धातु = ताम्र।

सिक्के का आकार = गोलाकार।

सिक्के का व्यास = 2.5 सै.मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.4 सै.मी.।

सिक्के का भार = 14.9 ग्राम

सिक्के का काल = कुषाण कालीन (दू० शत० ई० पू०)।

सिक्के की लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन लिपि।

सिक्का पंजीकरण संख्या = एम. डी.आई/एच.पी.456.

संग्रहकर्ता : कमल के. प्यासा (अपने संग्रह से), परूथी संग्रहालय, मण्डी।

प्राप्ति स्थान : चक्कर, मण्डी।

सिक्के का विवरण = इस सिक्के के एक ओर खड़ी मुद्रा में मानव आकृति दिखाई गई है। दूसरी ओर की आकृति के साथ नंदी को दिखाया गया है लेख स्पष्ट नहीं दिखाई देता और यह सिक्का कुषाण कालीन है।

  1. सिक्के धातु = ताम्र।

सिक्के का आकार = गोलाकार।

सिक्के का व्यास = 1.9 सै.मी.।

सिक्के की मोटाई = 0.25 सै.मी.

सिक्के का भार = 6 ग्राम।

सिक्के का काल = दूसरी श ०ई.०पू.०।

सिक्का लेख लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन।

सिक्का पंजीकरण संख्या = एम. डी.आई/एच.पी./459

संग्रह करता = कमल के. प्यासा, परूथी संग्रहालय, मण्डी।

प्राप्ति स्थान = चक्कर, बाजार से खरीदा गया।

सिक्का विवरण = कुषाण कालीन इस सिक्के के एक ओर लंबा सा कोट धारण किए खड़ी मानव आकृति दिखाई गई है, जिसके दाएं हाथ में कमंडल व बाईं ओर सब कुछ अस्पष्ट है। सिक्के के दूसरी तरफ भी सब कुछ स्पष्ट ही है।

3.सिक्का धातु = ताम्र।

सिक्का आकर = गोल।

सिक्का व्यास = 2.0 सै.मी.।

सिक्का मोटाई = 0.15 से 0.25 सै.मी.।

सिक्का भार = 5.8ग्राम।

सिक्का काल = दूसरी श. ई. पू.।

सिक्का लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन।

सिक्का पंजीकरण संख्या = एम.आई. डी./एच.पी./457

सिक्का संग्रहकर्ता = कमल के. प्यासा,परुथी संग्रहालय, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान = चक्कर मण्डी, खरीदा गया बाजार से ।

सिक्का विवरण = सिक्के के एक ओर खड़ी मानव आकृति के हाथ में कुछ पकड़ रखा है जो कि स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर आसन मुद्रा में बैठी (महात्मा बुद्ध) आकृति दिखाई गई है। तांबे का यह सिक्का भी कुषाण कालीन ही है।

4.सिक्का धातु = ताम्र।

सिक्का आकर = गोलाकार।

सिक्का व्यास = 3.2 सै.मी.।

सिक्का मोटाई = 0.4 सै मी.।

सिक्का भार = 16.9 ग्राम।

सिक्का काल = कुषाण कालीन (दूसरी शताब्दी)।

सिक्का लिपि = अस्पष्ट बैक्ट्रीयन।

सिक्का संग्रह करता = स्व. चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान : चक्कर, मण्डी।

सिक्का विवरण = प्राप्त सिक्के के एक ओर लिपि के साथ मानव आकृति भी है, जिसके दाईं तरफ हाथ में त्रिशूल दिखाया गया है और बाईं ओर के हाथ में अग्नि पात्र पकड़े दिखाया गया है। दिखाई गई मानव आकृति का पहना कोट आगे से खुला है और बाईं ओर एक अक्षर लिखा है। सिक्के के दूसरी ओर एक बैल स्वार को दिखाया गया है और लेख अस्पष्ट है। सिक्का विम कैडफैसिस से संबंधित है।

5.सिक्का धातु = सोना।

सिक्का आकर = गोलाकार।

सिक्का व्यास = 2.5 सै.मी.के आस पास।

सिक्का मोटाई = 0.15 सै. मी.।

सिक्का भार = 7.8ग्राम (8माशा)।

सिक्का काल = कुषाण कालीन।

सिक्का लिपि = यूनानी ।

सिक्का संग्रह करता = स्व. ओम प्रकाश, सुनार मण्डी ।

सिक्का प्राप्ति स्थान = मण्डी।

सिक्का विवरण = मण्डी से प्राप्त इस सोने के सिक्के में मानव आकृति व लेख दोनों मिलते हैं। दाढ़ी वाले मानव आकृति के, दाएं हाथ में कमंडल व बाएं हाथ में त्रिशूल दिखाया गया है। मानव आकृति द्वारा पहना लम्बा कोट आगे से बंद है। आकृति के दोनों तरफ यूनानी लिपि में, ( ∆ K O ∆ P 0 ^ V तथा N K p K I K O p ∆ N )।

सिक्के के दूसरी ओर की आकृति के एक हाथ ऊपर उठा हैं व दूसरा कमर पर रखे दिखाया गया है। इसमें भी यूनानी लिपि के अक्षर व M I I P O लिखा मिलता है। विद्वान मूलर के अनुसार यह शब्द पर्शिया के,Mithra सूर्य देवता को प्रकट करता है। वैसे सोने के इस सिक्के को कैनारकी सिक्कों के अंतर्गत रखा गया है जो कि कैडफाईसिस के बाद के हैं।

कुषाण कालीन कुछ और भी अलग अलग भार व आकर के सिक्के हैं लेकिन लेख व आकृति के स्पष्ट नहीं होने के कारण उनका वर्णन नहीं किया जा रहा जो कि मेरे पास सुरक्षित हैं व कई अन्य स्थानों से भी प्राप्त हो चुके हैं।

कुनिंद या कुणिन्द सिक्के:

6.सिक्का धातु = ताम्र।

सिक्का आकर = गोलाकार।

सिक्का व्यास = 1.5 सै.मी.।

मोटाई = 0.05 सै.मी.।

सिक्का भार = 1.99 ग्राम।

सिक्का काल = प्रथम श. ई. पू.।

सिक्का लिपि = खरोष्ठी व ब्राह्मी, भाषा संस्कृत।

सिक्का संग्रहकर्ता = स्व. चंद्रमणि, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान : चक्कर मण्डी।

सिक्का विवरण = कुनिंद कालीन इस सिक्के के दाईं ओर हिरन व बाईं ओर एक नारी को दिखाया गया है। हिरन के पास कुछ चिन्ह भी दिखाए गए हैं और खरोष्ठी लिपि में “राजनहा कुणिदसा अमोगभूतिया महाराजस्य” लिखा है।

सिक्के के दूसरी ओर छह चापों वाली पहाडी पर एक छतरी सी दिखाई गई है, साथ ही एक स्वास्तिक ,त्रिभुज व एक वृक्ष के चिन्ह भी दिखाए गए हैं। सिक्के के शेष भाग में चारों ओर ब्राह्मी लिपि में वैसे ही लिखा जो कि खरोष्ठी में लिखा है।

7.सिक्का धातु = ताम्र।

सिक्का आकर = गोलाकार।

सिक्का व्यास = 1.7 सै.मी.।

सिक्का मोटाई = 0.1 सै.मी.।

सिक्का भार = 1.99 ग्राम।

सिक्का काल = प्रथम श. ई. पू.।

सिक्का लिपि = खरोष्ठी व ब्राह्मी लिपि, भाषा संस्कृत।

सिक्का संग्रहकर्ता = स्व. चंद्र मणि कश्यप, मण्डी।

सिक्का प्राप्ति स्थान = चक्कर, मण्डी।

सिक्का विवरण = यह कुनिंद सिक्का भी पूर्व वर्णित क्रम संख्य 6 की तरह ही है, केवल थोड़े आकर प्रकार में अंतर है, शेष सभी तरह से बराबर ही है।

इसी तरह के कई अन्य सिक्के भी इन्हीं के संग्रह में देखे गए हैं।

हिमाचल : धातु (ताम्र पट्ट) अभिलेख, संदर्भ बिलासपुर – डॉ. कमल के. प्यासा

Daily News Bulletin

Nurturing Creativity – Keekli Charitable Trust, Shimla

Related articles

Sacred Heart Convent School Sparkles with Excellent CBSE XII Results

Sacred Heart Convent School, Dhalli has once again showcased its academic brilliance by delivering an exceptional performance in...

Chapslee School Students Shine Bright in CBSE Class XII Exams 2026

Chapslee School, Bharari, has once again reaffirmed its tradition of academic excellence by delivering an exceptional performance in...

IIAS Shimla decodes OTT boom in global entertainment lecture

Indian Institute of Advanced Study (IIAS), Rashtrapati Nivas, hosted a compelling special lecture on “The Expanding Scope of...

Shivalik Nursing Institute hosts vibrant Nurses Week finale

Shivalik Institute of Nursing concluded its week-long celebrations of International Nurses Week 2025 with a vibrant valedictory function...