तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने शनिवार को नीट पेपर लीक मामले को लेकर केन्द्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह देश के लाखों युवाओं के भविष्य के साथ सीधा अन्याय है।
शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान धर्माणी ने कहा कि छात्र अपने भविष्य को संवारने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन केन्द्र सरकार उनकी मेहनत और सपनों के प्रति गंभीर नहीं दिख रही। उन्होंने कहा कि करीब 23 लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ हुआ है और इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को देश के छात्रों से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लगभग 12 हजार विद्यार्थियों ने भी नीट परीक्षा दी थी और पेपर लीक से उनका भविष्य प्रभावित हुआ है। धर्माणी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार पेपर लीक की घटना सामने आई है, लेकिन पहले के मामलों में भी दोषियों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं है। इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए क्योंकि इसमें कई लोगों की संलिप्तता हो सकती है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की उदासीनता छात्रों के साथ अन्याय को दर्शाती है। धर्माणी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि केन्द्र सरकार जांच एजेंसियों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हितों के लिए कर रही है।
उन्होंने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में वर्तमान कांग्रेस सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की है। उन्होंने दावा किया कि कर्मचारी चयन आयोग को भंग करने के बाद राज्य में किसी भी प्रतियोगी परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है, जबकि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में पुलिस भर्ती सहित कई पेपर लीक के मामले सामने आए थे।



