जिला शिमला के विभिन्न उपमंडलों में आपदा प्रबंधन तैयारियों को परखने के लिए सोमवार को मेगा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस दौरान शिमला शहरी क्षेत्र की सब्जी मंडी और राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला भट्टाकुफर सहित कई स्थानों पर भूकंप जैसी काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।
सब्जी मंडी क्षेत्र में सुबह 9 बजे रिक्टर स्केल पर 8.0 तीव्रता के भूकंप का काल्पनिक परिदृश्य तैयार किया गया। सूचना मिलते ही अतिरिक्त आयुक्त नगर निगम डॉ. भुवन शर्मा के निर्देशन में राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। अभ्यास के अनुसार कई भवन क्षतिग्रस्त हुए और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित दिखाए गए। इस दौरान घायलों को दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल भेजा गया, जबकि मौके पर ही मेडिकल कैंप लगाकर मामूली रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया। राहत दलों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सैकड़ों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के कंट्रोल रूम से पूरे अभ्यास की लगातार निगरानी की गई और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित किया गया। इस मॉक ड्रिल में नगर निगम, एसडीआरएफ, सेना, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और आपदा मित्रों सहित कई एजेंसियों ने भाग लिया।
इसी क्रम में भट्टाकुफर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में सुबह 9:26 बजे भूकंप का काल्पनिक परिदृश्य बनाया गया। इसमें विद्यालय भवन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त माना गया तथा कई लोग मलबे में फंसे दिखाए गए। राहत दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाया।
जिला शिमला के रोहड़ू, चौपाल, कुपवी, ठियोग, कोटखाई, जुब्बल, कुमारसैन और डोडरा-क्वार उपमंडलों में भी इसी तरह की मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इन स्थानों पर स्कूलों, होटलों और सार्वजनिक स्थलों पर भूकंप की काल्पनिक स्थिति बनाकर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर लोगों के फंसे होने और घायलों के उपचार का परिदृश्य तैयार कर आपदा प्रबंधन तंत्र की कार्यक्षमता को परखा गया।
इस मेगा मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना, आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना और राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
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