शिमला के बचत भवन में उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में शहर के सरकारी और निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा पुख्ता करने के लिए समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में 28 प्रमुख स्कूलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कई प्रधानाचार्यों के अनुपस्थित रहने या प्रतिनिधि भेजने पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर स्कूल प्रबंधन को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी दिखानी होगी।
सुरक्षा तंत्र को कड़ा करते हुए प्रशासन ने daily safety certificate जारी करना अनिवार्य कर दिया है। अब हर स्कूल प्रबंधन को सुबह कक्षाएं शुरू होने से पहले और छुट्टी के बाद परिसर की नियमित जांच कर जिला पुलिस को रिपोर्ट देनी होगी। भविष्य में किसी भी सुरक्षा संबंधी अफवाह की स्थिति में पुलिस सबसे पहले यह पड़ताल करेगी कि प्रबंधन ने संबंधित दिन का सुरक्षा प्रमाणपत्र जमा किया था या नहीं। इसके अतिरिक्त, परिसरों में तैनात गार्ड्स की निगरानी भी बढ़ा दी गई है।
बैठक में तैयार स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत बाउंड्री वॉल, सीसीटीवी कैमरे, पावर बैकअप, विजिटर रजिस्टर और नियंत्रित प्रवेश-निकास सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, स्कूल स्टाफ, बस ड्राइवरों, सुरक्षा कर्मियों और परिसर में कार्यरत मजदूरों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य होगा। हर संस्थान में एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा जो मासिक सुरक्षा ऑडिट और सुरक्षा समितियों की गतिविधियों की देखरेख करेगा।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गौरव जीत सिंह ने स्कूल प्रशासन को निर्देश दिए कि परिसर के पास किसी भी संदिग्ध व्यक्ति, वस्तु या ऊपर उड़ते ड्रोन की सूचना तुरंत पुलिस को दें। उन्होंने सुरक्षा कर्मियों द्वारा प्रवेश बिंदु पर सख्त चेकिंग करने पर जोर दिया और कहा कि किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन के साथ तुरंत संपर्क स्थापित किया जाए।



