राजकीय महिला महाविद्यालय (आरकेएमवी) की पूर्व छात्राओं ने अपने हुनर को स्वरोजगार में बदलकर आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। कॉलेज के फाइन आर्ट्स विभाग की पूर्व छात्राओं ने एकजुट होकर ‘इन्द्रेणी’ नाम से महिला चित्रकारों का एक अनूठा मंच तैयार किया है। इसी मंच के बैनर तले शिमला के ऐतिहासिक गेयटी थिएटर में 12 से 16 सितंबर 2026 तक ‘महासू आर्ट शिमला’ के सहयोग से 5वीं वार्षिक चित्रकला प्रदर्शनी आयोजित की गई। इस प्रदर्शनी में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित उत्तराखंड, झारखंड और नेपाल की 23 उभरती महिला चित्रकारों ने अपनी शानदार कृतियों का प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने युवा बेटियों के इस प्रयास और उनकी कला की जमकर तारीफ की। उन्होंने सभी प्रतिभागी कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि आरकेएमवी की बेटियों ने अपनी प्रतिभा के बल पर न केवल आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि प्रदेश की संस्कृति को भी नया जीवन दिया है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इन महिला कलाकारों का उत्साह बढ़ाने के लिए इनकी बनाई पेंटिंग्स जरूर खरीदें।
वर्ष 2021 में आरकेएमवी के सहायक प्रोफेसर डॉ. भादर सिंह के मार्गदर्शन में जमुना गुरुंग, सुषमा शर्मा, सुष्मिता राय, सपना, कृतिका, निर्मला और अमीषा ने मिलकर ‘इन्द्रेणी’ की नींव रखी थी। तब से हर साल यह समूह गेयटी थिएटर में अपनी प्रदर्शनी लगाता आ रहा है। इस मंच से जुड़ी छात्राएं अब घर बैठे पेंटिंग्स बनाकर देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बेच रही हैं, जिससे उन्हें बेहतरीन आय प्राप्त हो रही है।
प्रदर्शनी में शामिल कलाकारों ने अपनी सफलता की कहानियां भी साझा कीं। नेपाल की सुष्मिता राय ने शिमला के ऐतिहासिक आर्किटेक्चर पर पेंटिंग्स बनाकर अब तक करीब 2 लाख रुपये की कमाई की है। वहीं, कोटगढ़ की रूचिका ने पहाड़ी टोपी और हिमाचली शॉल की थीम पर पेंटिंग्स बनाकर 7 से अधिक देशों में अपनी कला भेजी है और 5 लाख रुपये अर्जित किए हैं। इसके अलावा सुन्नी की सपना ने गद्दी समुदाय के जीवन संघर्ष को कैनवास पर उकेरकर 25 से अधिक पेंटिंग्स बेची हैं। ‘इन्द्रेणी’ का यह प्रयास आज प्रदेश की दर्जनों बेटियों के लिए आजीविका और सम्मान का जरिया बन चुका है।
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