COP-17: भारत ने येरेवन में जारी कीं जैव विविधता से जुड़ी 4 अहम रिपोर्ट्स

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जैविक विविधता पर कन्वेंशन (CBD) के 17वें सम्मेलन (COP-17) के इतर येरेवन, आर्मीनिया में आयोजित एक विशेष सत्र में भारत ने प्रकृति संरक्षण, जैव सुरक्षा और एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहलों को दुनिया के सामने रखा है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस साइड इवेंट को संबोधित करते हुए वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उन्हें प्रभावी क्रियान्वयन, टिकाऊ वित्तपोषण और ठोस परिणामों में बदलने का आह्वान किया। पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) और UNDP के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में आर्मीनिया के पर्यावरण मंत्री और COP-17 के अध्यक्ष हम्बार्दजुम मातेवोसियन समेत कई वैश्विक दिग्गज मौजूद रहे।

‘फ्रॉम पॉलिसी टू प्रैक्टिस: एडवांसिंग इंडियाज बायोडायवर्सिटी कमिटमेंट्स थ्रू इनोवेशन, फाइनेंस, ABS एंड OECMS’ विषय पर मुख्य भाषण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण और विकास एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। उन्होंने कुनमिंग-मॉन्ट्रियल ग्लोबल बायोडायवर्सिटी फ्रेमवर्क का जिक्र करते हुए कहा कि देशों की जिम्मेदारी केवल लक्ष्य तय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए क्षमता निर्माण और संसाधनों को जुटाना भी उतना ही जरूरी है। इस दौरान उन्होंने ‘LiFE’ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) के संदेश को दोहराते हुए प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने पर बल दिया और यह रेखांकित किया कि भारत में जैव विविधता लोगों के जीवन, ज्ञान और आजीविका से गहराई से जुड़ी हुई है।

कार्यक्रम के दौरान भारत की ओर से चार अहम प्रकाशनों का विमोचन किया गया, जो पर्यावरण और संरक्षण के विभिन्न पहलुओं को दिशा देंगे। इनमें भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (I-OECMs) के लिए दिशा-निर्देश 2026 शामिल हैं, जो पारंपरिक संरक्षित क्षेत्रों से बाहर भी संरक्षण परिणामों को मान्यता देते हैं। इसके अलावा, कार्टाजेना प्रोटोकॉल ऑन बायोसेफ्टी पर 5वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट, कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी हैंडबुक (भारतीय परिप्रेक्ष्य), और भारत की ABS सफलता की कहानी को दर्शाने वाली पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जो वैश्विक स्तर पर भारत के नेतृत्व को रेखांकित करती हैं।

नागोया प्रोटोकॉल के महत्व को समझाते हुए श्री यादव ने आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के निष्पक्ष और न्यायसंगत बंटवारे पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत का अनुभव यह साबित करता है कि मजबूत संस्थाओं, डिजिटल नवाचार और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से नीतियों को जमीनी स्तर पर बेहद सफल बनाया जा सकता है। साथ ही, उन्होंने वैश्विक ढांचे को साकार करने के लिए आपसी सहयोग, दक्षिण-दक्षिण ज्ञान के आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय साझीदारी की वकालत की। कार्यक्रम के अंत में आर्मीनिया के पर्यावरण मंत्री और CBD सचिवालय के ABS प्रमुख ने भारत के इन दूरदर्शी प्रयासों की जमकर सराहना की।

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