अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और मामलों की समीक्षा को लेकर शिमला जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय सतर्कता एवं प्रबोधन समिति की बैठक में यह स्पष्ट निर्देश दिए गए कि लंबित मामलों में जांच के दौरान किसी भी धारा को शिकायतकर्ता की जानकारी के बिना न हटाया जाए।
अधिनियम के तहत पीड़ितों को दी जाने वाली राहत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रशासन ने जानकारी दी कि 1 जून से 30 सितंबर, 2026 के बीच विभिन्न मामलों के प्रभावितों को कुल 6,87,280 रुपये की आर्थिक सहायता वितरित की गई है ताकि पीड़ित परिवारों को संबल मिल सके। नियम के तहत इस कानून के अंतर्गत पीड़ितों को श्रेणी के आधार पर न्यूनतम 85 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 8.25 लाख रुपये तक की राहत राशि देने का प्रावधान है।
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि 1 जून से 30 सितंबर के बीच जिला के विभिन्न पुलिस थानों में कुल 18 नए मामले दर्ज किए गए—जिनमें जुलाई में 5, अगस्त में 9 और सितंबर में 4 मामले शामिल रहे। इसके अलावा, जिन 31 मामलों में कैंसिलेशन रिपोर्ट का अनुमोदन होना है, उनकी भी समीक्षा की गई और निर्देश दिए गए कि एक महीने बाद इन मामलों पर पूरे ब्यौरे के साथ चर्चा की जाए ताकि आगे की उचित कार्रवाई तय हो सके।
जिला अदालतों में इस एक्ट के तहत कुल 49 मामले लंबित हैं—जिनमें वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2026 तक के मामले शामिल हैं, जबकि रामपुर न्यायालय में 5 मामले लंबित हैं। बैठक में 7 ऐसे मामलों पर भी विशेष रूप से चर्चा हुई जिनमें अन्वेषण अभी लंबित चल रहा है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून के प्रावधानों और नागरिकों के अधिकारों की सही जानकारी हर तक पहुंचे, जिसके लिए शिमला शहरी, ग्रामीण, रामपुर, कुमारसैन, जुब्बल, रोहड़ू, कोटखाई, ठियोग, चौपाल, ननखड़ी, सुन्नी और चिड़गांव सहित विभिन्न तहसीलों और उपमंडलों में विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
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