बच्चों को सगे-संबंधियों व जानकार से यौन उत्पीड़न का ज्यादा खतरा

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जानी-मानी बाल एवं महिला अधिकार कार्यकर्ता और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती विजय लांबा का कहना है ज्यादातर मामलों में सगे-संबंधी और पड़ोसी ही बच्चों को यौन उत्पीड़न का शिकार बनाते हैं। इनमें पिता, नाना, दादा, चाचा, मामा, भाई और जीजा शामिल हैं। बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए समाज के बड़े पैमाने पर जागरूकता की जरूरत है। कार्यक्रम की संयोजक और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान की विद्यार्थी शिवानी अत्री और मीनाक्षी शबाब ने यह जानकारी दी। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि आमतौर पर पुलिस व प्रशासन का उदासीन रवैया बच्चों के न्याय के रास्ते में बाधा बनता है।

मानवाधिकार जागरूकता पर उमंग फाउंडेशन के 35वें साप्ताहिक वेबीनार – “बच्चों के साथ यौन अपराध और पोक्सो कानून” में  लांबा ने कहा कि माता- पिता को बच्चों के मामले में रिश्तेदारों से भी सतर्क रहना चाहिए। गंभीर बात यह है कि बचपन में यौन उत्पीड़न झेलने वाले बच्चे भी बड़े होकर दूसरे बच्चों का शोषण करते हैं।उन्होंने कहा कि देश में प्रति घंटे तीन बच्चों से बलात्कार और 5 बच्चों के साथ अन्य यौन उत्पीड़न होता है। हर चार में से एक लड़की और 6 में से एक लड़के को कभी ना कभी यौन शोषण का शिकार होना पड़ता है। बच्चों के साथ यौन अपराधों की शिकायत राष्ट्रीय चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और हिमाचल में गुड़िया हेल्पलाइन के नंबर 1515 पर की जा सकती है। लांबा में कई ऐसे मामलों की चर्चा की जिसमें सगे भाई, पिता, चाचा, दादा, नाना और जीजा आदि ने बच्चियों का यौन शोषण किया, कई मामलों में बच्चियों का गर्भपात कराया गया या उनकी डिलीवरी हुई। ऐसे मामलों का बच्चियों के मस्तिष्क और शारीरिक विकास पर बहुत गंभीर असर होता है। जूविनाइल जस्टिस बोर्ड सोलन की पूर्व सदस्य विजय लांबा ने बताया कि बाल अपराधों के⁶ मामले में राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े हैरान करने वाले हैं। वर्ष 2019 में 12 लाख बच्चियां वेश्यावृत्ति में लिप्त थीं। कोविड-19 दौरान हुए लॉकडाउन में बच्चों के साथ यौन अपराधों में भी वृद्धि दर्ज हुई है।

उनका कहना था कि माता-पिता को सतर्क रहने के साथ-साथ बच्चों के व्यवहार पर भी नजर रखनी चाहिए यदि बच्चा गुमसुम रहे, खाना खाना कम कर दे, पढ़ाई में उसका दिल न लगे, और आत्मविश्वास कम हो जाए तो उसके कारण जानना आवश्यक है। ऐसे बच्चे यौन शोषण का शिकार भी हो सकते हैं। उनकी काउंसलिंग आवश्यक है। उन्होंने कहा पोक्सो कानून और जूविनाइल जस्टिस एक्ट की बारीकियां भी समझाईं। उन्होंने कहा कि बच्चों की अश्लील वीडियोग्राफी करना गंभीर अपराध है। ऐसे मामले में दोषी को 5 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा हो सकती है। बच्चों के साथ यौन अपराध होने पर पुलिस केस दर्ज न करे तो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सहायता ली जा सकती है। अथवा सीधे कोर्ट में केस दर्ज कराया जा सकता है। जूविनाइल जस्टिस एक्ट के अंतर्गत जिला चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास मजिस्ट्रेट की शक्तियां होती हैं। बच्चे के बेसहारा होने की स्थिति में कमेटी शेल्टर होम में ठहराने और अन्य सब प्रकार की मदद का प्रबंध करती है। उन्होंने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून (पोक्सो) की बारीकियां भी बताई। इसमें यौन अपराधों के शिकार बच्चों को मुआवजा दिए जाने का भी प्रावधान है। कार्यक्रम के संचालन में सवीना जहां, यश ठाकुर, अमृता नेगी, मीनाक्षी शबाब, उदय वर्मा और संजीव शर्मा ने सहयोग दिया।

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