मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग को ब्यास नदी पर एसजेवीएनएल (SJVNL) द्वारा निर्मित की जा रही 66 मेगावाट की धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना को राज्य के नियंत्रण में लेने के लिए अदालत में हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। ऊर्जा विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार इस परियोजना की लागत की पहली किश्त का भुगतान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के संसाधनों और जनता के अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार एसजेवीएनएल के अधीन चल रही लुहरी और सुन्नी जलविद्युत परियोजनाओं का अधिग्रहण करने के लिए भी प्रतिबद्धता के साथ प्रयास कर रही है। बैठक के दौरान उन्होंने निर्माणाधीन विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और इन्हें तय समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राज्य के राजस्व में वृद्धि हो सके और स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिले।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 450 मेगावाट क्षमता वाली शोंगटोंग विद्युत परियोजना सितंबर 2027 तक पूरी तरह क्रियाशील हो जाएगी। इस परियोजना में तीन टर्बाइनों के चालू होने के बाद उत्पादित होने वाली बिजली के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड (HPSEBL) के साथ पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) हस्ताक्षरित किया जाएगा।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने पूह से समदो और समदो से काज़ा तक निर्माणाधीन 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन के कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने 1 MWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली से लैस 2 मेगावाट की रंगरिक सौर ऊर्जा परियोजना की प्रगति का जायजा लेते हुए इसे बर्फबारी का मौसम शुरू होने से पहले चालू करने के सख्त निर्देश दिए, ताकि सर्दियों में जनजातीय क्षेत्र के लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिल सके।
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