डॉ. कमल के. प्यासा – जीरकपुर, मोहाली
छठी शताब्दी (550 ईस्वी) में राजा मारु द्वारा अयोध्या से इधर पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचकर भरमौर (ब्रह्मपुर) में अपना राज्य स्थापित किया गया था। बाद में 920 ईस्वी में साहिल वर्मन द्वारा अपनी बेटी चम्पावती के कहने पर चम्बा को अपनी राजधानी बनाकर ऐतिहासिक नगर की स्थापना की गई थी।
चम्बा के प्रसिद्ध तांबे के सिक्कों में चकली नामक सिक्का अपनी विशेष पहचान रखता है। पांच चकलियों से एक आना बनता था और आम लेन-देन में इन्हीं का चलन होता था। राजा साहिल वर्मन (920-940 ईस्वी) द्वारा चकली पर गुरु चरपट नाथ के सम्मान में छिदे कान व कुंडल का चित्रण किया गया था।
चम्बा रियासत में प्रचलित चकली व अन्य सिक्कों का वर्णन इस प्रकार से किया जा सकता है:
1. सिक्का आम चकली
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सिक्के की धातु: तांबा
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सिक्के का आकार: गोलाकार
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सिक्के का व्यास: 9.00 – 22 मि.मी.
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सिक्के की मोटाई: 2.00 – 3.00 मि.मी.
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सिक्के का भार: 6.00 – 6.40 ग्राम
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सिक्के का काल: 10वीं शताब्दी (920 – 940 ईस्वी)
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सिक्के पर लिपि: देवनागरी
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सिक्का संग्रहकर्ता: कमल के. प्यासा (निजी संग्रह), प्रूथी संग्रहालय, मंडी
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सिक्का प्राप्ति स्थान: अपने मित्र डॉ. बी.एल. से प्राप्त
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सिक्के का विवरण: तांबे के इस चकली सिक्के के एक ओर नागरी लिपि के अक्षर व दूसरी ओर त्रिशूल व देवनागरी के अक्षर देखे जा सकते हैं।
2. सिक्का चकली या एक पैसा – राजा चरहट सिंह (1808 – 1844)
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सिक्के की धातु: तांबा
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सिक्के का आकार: गोलाकार
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सिक्के का व्यास: 22.00 मि.मी.
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सिक्के की मोटाई: 1.50 – 2.50 मि.मी.
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सिक्के का भार: 6.00 ग्राम
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सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी (1808 – 1844)
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सिक्के पर लिपि: देवनागरी
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सिक्का संग्रहण स्थल: भूरी सिंह संग्रहालय, चम्बा
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सिक्का प्राप्ति स्थान: चम्बा
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सिक्के का विवरण: राजा चरहट सिंह के इस एक पैसे वाली चकली के एक ओर देवनागरी में “श्री लक्ष्मी नाथ सहाय” व दूसरी ओर देवनागरी में ही चरहट सिंह, त्रिशूल व रोमन अक्षर ‘सी’ लिखा देख सकते हैं।
3. चकली सिक्का या एक पैसा – राजा श्री सिंह (1844 – 1870)
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सिक्के की धातु: तांबा
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सिक्के का आकार: गोलाकार
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सिक्के का व्यास: 20.00 – 20.60 मि.मी.
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सिक्के की मोटाई: 1.50 – 2.50 मि.मी.
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सिक्के का भार: 6.20 – 6.40 ग्राम
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सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी (1844 – 1870)
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सिक्के पर लिपि: देवनागरी
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सिक्का संग्रहण स्थल: भूरी सिंह संग्रहालय, चम्बा
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सिक्का प्राप्ति स्थान: चम्बा
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सिक्के का विवरण: राजा श्री सिंह के चकली (एक पैसे) वाले सिक्के के एक ओर “श्री लक्ष्मी नाथ सहाय” व दूसरी ओर त्रिशूल व राजा का नाम देवनागरी में लिखा है। वैसे इस सिक्के की मोटाई व व्यास राजा चरहट सिंह के सिक्के से कम ही देखा गया है। राजा श्री सिंह के 1/2 पैसे वाले सिक्के का भार 3.20 – 3.24 ग्राम व व्यास 18.20 मि.मी. देखा गया है।
4. सिक्का चकली या एक पैसा – राजा श्याम सिंह (1870 – 1904)
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सिक्के की धातु: तांबा
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सिक्के का आकार: गोलाकार
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सिक्के का व्यास: 19.00 – 21.00 मि.मी.
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सिक्के की मोटाई: ऊपर वर्णित अन्य चकली से कुछ अधिक ही देखी गई, क्योंकि तब मशीनी सिक्के बनने लगे थे।
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सिक्के का भार: 4.50 – 6.30 ग्राम
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सिक्के का काल: 19 – 20वीं शताब्दी (1870 – 1904)
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सिक्के पर लिपि: देवनागरी व लैटिन
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सिक्का संग्रहण स्थल: भूरी सिंह संग्रहालय, चम्बा
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सिक्का प्राप्ति स्थान: चम्बा
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सिक्के का विवरण: एक पैसे के चकली सिक्के की बनावट ऊपर वर्णित क्रम 2, राजा चरहट सिंह जैसी ही देखी गई है और राजा श्याम सिंह के देवनागरी में नाम सहित त्रिशूल व दोनों ओर रोमन अक्षर ‘सी’ को देखा जा सकता है।
5. सिक्का चकली एक पैसा – राजा लक्कड़ शाह (1844)
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सिक्के की धातु: तांबा
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सिक्के का आकार: गोलाकार व आंशिक चकोर भी
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सिक्के का व्यास: 19.00 मि.मी.
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सिक्के की मोटाई: एक समान नहीं बल्कि सिक्के खुरदरे किस्म के देखे गए हैं।
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सिक्के का भार: 5.70 – 5.80 ग्राम
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सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी (1844)
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सिक्के पर लिपि: देवनागरी / संस्कृत
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सिक्का संग्रहण स्थल: भूरी सिंह संग्रहालय, चम्बा
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सिक्का प्राप्ति स्थान: चम्बा
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सिक्के का विवरण: कहते हैं कि लक्कड़ शाह विद्रोही प्रवृत्ति का था, इसलिए उसका शासन थोड़े समय के लिए ही रहा। इसके साथ ही साथ उसने चकली पर त्रिशूल का निशान डालना भी उचित नहीं समझा था। चकली के एक ओर देवनागरी संस्कृत में “चर्हतर्सिंह समयं मुद्रायां” और दूसरी ओर “लछमी नाथ मुद्रायां” लिखा मिलता है, लेकिन त्रिशूल का चिह्न सिक्कों पर कहीं नहीं मिलता।


