डॉ. कमल के. प्यासा – जीरकपुर, मोहाली
सिरमौर रियासत की स्थापना वर्ष 1139 ई. में जैसलमेर के राजा रसालू (सातवाहन के पुत्र) द्वारा की गई थी। 1195 ईस्वी में राजा शुभांश प्रकाश द्वारा सिरमौरी ताल के स्थान पर राजबन को राजधानी बना दिया गया और यहीं से प्रकाश वंश की शुरुआत भी मानी जाती है। राजा उदय प्रकाश के समय राजधानी कालसी बनाई गई और फिर अंत में राजा करम प्रकाश द्वारा 1621 ईस्वी में राजधानी नाहन बना दी गई।
1803 ईस्वी में गोरखों ने आक्रमण करके सिरमौर को अपने नियंत्रण में ले लिया। बाद में 1815 ईस्वी में एंग्लो-गोरखा युद्ध के पश्चात इस क्षेत्र से गोरखों को निकालकर अंग्रेज़ों द्वारा फिर से गद्दी राजा फतेह सिंह को दे दी गई। आज़ादी के पश्चात सिरमौर रियासत के राजा राजेंद्र प्रकाश 15 अप्रैल, 1948 को भारत गणराज्य में शामिल हो गए और सिरमौर को हिमाचल का एक ज़िला बना दिया गया।
रियासत के समय (सिरमौर में) केवल तांबे के सिक्कों का ही चलन था और वह भी राजा फतेह सिंह (1815-1833) के समय में ही देखने को मिलता है। बाद में, रियासत के ब्रिटिश संरक्षण में आने से ब्रिटिश सिक्कों अर्थात रुपया, आना व पैसे का चलन शुरू हो गया था।
1. रियासत कालीन फतेह सिंह सिक्का
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सिक्के की धातु: तांबा
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सिक्के का आकार: गोलाकार, मुग़ल सिक्कों की तरह मोटा सा
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सिक्के का व्यास: 17.20 मि.मी.
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सिक्के की मोटाई: 2.50 – 4.00 मि.मी.
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सिक्के का भार: 12.10 – 19.45 ग्राम
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सिक्के का काल: 19वीं शताब्दी (1815-1833)
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सिक्के पर लिपि: फ़ारसी / उर्दू
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सिक्का संग्रहण स्थल: हिमाचल राज्य संग्रहालय, शिमला
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सिक्का प्राप्ति स्थल: नाहन, सिरमौर
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सिक्के का विवरण: सिरमौर रियासत के राजा फतेह सिंह के तांबे के इस सिक्के के एक ओर फ़ारसी में “राज पथ प्रकाश” व दूसरी ओर धनुष-बाण का चित्रण मिलता है। इन सिक्कों का प्रयोग आम जनजीवन में स्थानीय वस्तुओं की खरीद-फ़रोख्त में किया जाता था।


