हिमाचल : धातु अभिलेख, संदर्भ किन्नौर – डॉ. कमल के.प्यासा

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डॉ. कमल के.प्यासा – मण्डी

जहां किन्नौर से पाषाण अभिलेखों में चट्टान, गुहा, प्रतिमा व शिलालेख प्राप्त हुए हैं, वही यदि धातु अभिलेखों की बात की जाए तो इधर से धातु अभिलेखों के अंतर्गत धातु पट्ट व धातु प्रतिमा अभिलेख भी प्राप्त हुए हैं ,जिनका विस्तार से ब्यौरा नीचे दिया गया है।

किन्नौर क्षेत्र के धातु अभिलेख

1.नाकों मठ या लोत्सावा ल्हाखांग धातु पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 11वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : तिब्बती (भोटी), संस्कृत के शब्दों के साथ।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : नाकों मठ, किन्नौर।

अभिलेख विवरण : किन्नौर के इस, नाकों मठ की स्थापना 11वीं शताब्दी (996 – 1000ईस्वी के आस पास), जाने माने विद्वान लोचेन रिनचेन जगपो द्वारा की गई थी। अभिलेख में रिनचेन द्वारा पश्चिम हिमालय में स्थापित किए मठों के, वर्णन के साथ सभी शासकों व संरक्षकों की जानकारी भी दी गई है। नाकों क्षेत्र के प्रारंभिक इतिहास, संस्कृति व धर्म प्रचार की पूरी जानकारी भी इसी अभिलेख से ज्ञात हो जाती है।

2.कोठी (कोशटम्पी) चंडिका देवी मंदिर धातु पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु ।

अभिलेख प्रकार : धातु पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 12वीं शताब्दी के आसपास।

अभिलेख लिपि : तिब्बती(भोटी)।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : कोठी, देवी चंडिका मंदिर, काल्पा, किन्नौर।

अभिलेख विवरण : कोठी के देवी चंडिका मंदिर का ताम्र पट्ट अभिलेख तिब्बती लिपि में उत्कीर्ण है और ताम्र पट्ट से क्षेत्र के ठाकुर शासकों, व बुशहर रियासत के शासकों तथा उस समय की हिंदू व बौद्ध संस्कृति के आपसी मेल मिलाप की जानकारी मिलती है। इसी मंदिर में एक देवी माता की सोने की प्रतिमा भी देखी गई है, जिसे आर्क रूपी पालकी में रखा जाता है। प्रतिमा से हिंदू व बौद्ध शिल्प की झलक स्पष्ट दिखती है, जिससे स्पष्ट हो जाता है कि देवी माता की मान्यता दोनों ही धर्मों में बराबर ही रही है।

3.मुरंग किला प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु प्रतिमा अभिलेख।

अभिलेख काल : 10 वीं-11वीं शताब्दी।

अभिलेख लिपि : तिब्बती (भोटी) ।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : मुरंग किला, किन्नौर।

अभिलेख विवरण : किन्नौर के मोरंग किले में स्थापित 18 मुखों वाली प्रतिमा जो कि सोने चांदी सहित अष्ट धातु की बनी है, को शव पेटिका (Ark) के नाम से भी जाना जाता है। यह 18 मुखी प्रतिमा स्थानीय देवता उमेरिंग का भी प्रतिनिधत्व करती है। प्रतिमा का संबंध महाभारत के 18 दिनों से भी जोड़ा जाता है और इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसी प्रतिमा के आधार पीठ पर तिब्बती (भोटी) व शारदा लिपि में दान देने वालों व प्रतिमा की स्थापना करने वालों की जानकारी भी मिलती है। प्रतिमा पर इंडो तिब्बती शैली के साथ काश्मीरी कला का प्रभाव भी देखने को मिलता है। 18 मुखी प्रतिमा के अतिरिक्त कई एक अन्य प्रतिमाएं भी किले में देखी गई हैं।

4.भावनगर ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख श्रेणी : धातु।

अभिलेख प्रकार : धातु ताम्र पट्ट अभिलेख।

अभिलेख काल : 16वीं – 19वीं शताब्दी।

अभीलेख लिपि : शारदा व टांकरी, भाषा संस्कृत।

अभिलेख प्राप्ति स्थान : भावनगर, किन्नौर।

अभिलेख विवरण : भावनगर किन्नौर से मिलने वाले यह ताम्र पट्ट अभिलेख, जो कि शारदा व टांकरी लिपि में देखा गया है, को बुशहर के शासकों द्वारा जारी किया गया है। इस ताम्र पट्ट अभिलेख से किन्नौर बुशहर रियासत के संबंधों, भूमि अनुदान, प्रशासनिक व भूराजस्व व्यवस्था आदि की जानकारी मिलती है।

हिमाचल : धातु अधातु अभिलेख, संदर्भ लाहौल स्पीति – डॉ. कमल के. प्यासा

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