मातृवन्दना संस्थान शिमला द्वारा प्रकाशित और डॉ. रश्मीश सिंह सपेइया द्वारा लिखित पुस्तक ‘हिमगिरि सा चुपचाप गले’ का सोमवार को शिमला के गेयटी थिएटर स्थित गौथिक हॉल में विमोचन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिमाचल प्रांत के संघचालक वीर सिंह रांगड़ा ने की।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख प्रताप समयाल ने पुस्तक की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह पुस्तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक एवं कार्यकर्ता रहे ठाकुर राम सिंह, चेत राम, कुंज लाल ठाकुर और किशन चंद राजपूत के जीवन, संघर्ष और संगठनात्मक योगदान को प्रस्तुत करती है। इन कार्यकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश में संघ के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र प्रचारक प्रमुख बनवीर जी ने कहा कि वर्ष 1925 में नागपुर से शुरू हुई व्यक्ति निर्माण की साधना को हिमाचल में आगे बढ़ाने का कार्य इन कार्यकर्ताओं ने समर्पण भाव से किया। उन्होंने कुंज लाल ठाकुर और किशन चंद राजपूत के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके संघर्ष, सेवा भावना और संगठन के प्रति समर्पण को प्रेरणादायक बताया।
कार्यक्रम अध्यक्ष वीर सिंह रांगड़ा ने संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और राष्ट्र सेवा के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे कार्यकर्ताओं का निर्माण किया, जिन्होंने अपना जीवन समाज और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित कर दिया।
इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने मातृवन्दना संस्थान और लेखक डॉ. रश्मीश सिंह सपेइया के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पुस्तक में वर्णित चारों कार्यकर्ताओं का जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को शिक्षा के साथ-साथ देशभक्ति, सदाचार और सामाजिक जिम्मेदारी के मूल्यों को भी अपनाना चाहिए। पुस्तक समीक्षा प्रस्तुत करते हुए मातृवन्दना संस्थान के सदस्य एवं लेखक डॉ. कर्म सिंह ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।
समापन अवसर पर मातृवन्दना संस्थान के अध्यक्ष उमेश मोदगिल ने सभी अतिथियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक संघ कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी होने के साथ-साथ आम लोगों को संघ की कार्यप्रणाली और कार्यकर्ताओं के जीवन को समझने में सहायक होगी। कार्यक्रम में गोविंद ठाकुर और वीरेंद्र सपेइया विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।



