जयराम ठाकुर का कटाक्ष : हिमाचल के बजट में कोई राहत नहीं

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पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सुक्खू सरकार के बजट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे प्रदेश को गुमराह करने वाला और ठोस विकास प्रावधानों से रहित बताया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रमुख विभागों के बजट में 50 प्रतिशत से अधिक कटौती हुई है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा पेंशन, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कृषि और सड़क जैसे क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे बजट से हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भर कैसे बनेगा।

जयराम ठाकुर ने यह भी कहा कि जबकि पूर्व भाजपा सरकार ने रिकॉर्ड संख्या में नौकरियां सृजित कीं, सुक्खू सरकार के कार्यकाल में पिछले तीन वर्षों में 15,000 नौकरियों की कमी हुई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार से लगातार वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ है और राजस्व में केंद्र की हिस्सेदारी 53.6 प्रतिशत रही, बावजूद इसके कि सरकार लगातार केंद्र की आलोचना करती रही।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सुक्खू सरकार द्वारा घोषित अधिकांश योजनाओं के लिए पर्याप्त बजट प्रावधान नहीं था और पिछले तीन वर्षों की कई योजनाएं जमीन पर लागू नहीं हो पाईं। बजट का आकार तीन साल पहले के बराबर है, जबकि प्रमुख क्षेत्रों में लगातार कटौती हो रही है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की तुलना में प्रमुख क्षेत्रों में ₹2,354 करोड़ (21%) की कमी हुई, और अगले वर्ष में ₹3,188 करोड़ (41.77%) की और कटौती का अनुमान है। पूंजीगत व्यय पिछले तीन वर्षों में लगभग आधा घटकर ₹3,089 करोड़ रह गया है, जबकि पिछले चार वर्षों में राजस्व घाटा औसतन ₹10,620 करोड़ रहा।

ठाकुर ने रोजगार की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि उनकी सरकार के समय सरकारी नौकरियों का रिकॉर्ड 1,90,137 था, जबकि सुक्खू सरकार में यह घटकर 1,75,579 हो गई, यानी कुल 15,000 नौकरियां कम हुई हैं।

उन्होंने कहा कि प्रमुख योजनाओं के लिए बजट में कटौती की गई है। खेत बाड़ाबंदी योजना के लिए मात्र ₹10 करोड़ का प्रावधान किया गया, जबकि पूर्व सरकार ने ₹40 करोड़ आवंटित किया था। हिमकेयर योजना का बजट कम किया गया, और केवल एक लाख परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ दिया गया। 2026-27 में बिजली सब्सिडी का बजट ₹1,562 करोड़ से घटकर ₹858 करोड़ कर दिया गया।

वेतन स्थगन के संबंध में ठाकुर ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत ही वित्तीय आपातकाल की स्थिति में वेतन में कटौती की जा सकती है। वर्तमान बजट में वेतन के लिए ₹14,721 करोड़ का प्रावधान है, जो केवल ₹5 करोड़ अधिक है, जिससे महंगाई भत्ता देने का कोई संकेत नहीं है। उन्होंने बिजली रॉयल्टी और आबकारी से प्राप्ति के आंकड़ों में भी कमी पर सवाल उठाया।

जयराम ठाकुर ने निष्कर्ष में कहा कि सुक्खू सरकार का यह बजट केवल “झूठ का पुलिंदा” है, जिसका उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना और समय काटना है, न कि प्रदेश का वास्तविक विकास करना।

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