पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आपदा से प्रभावित हजारों लोगों के घर उजड़ गए हैं, लेकिन राज्य सरकार राहत पहुंचाने के बजाय मसखरी में व्यस्त है। उन्होंने कहा कि सर्दियां नजदीक हैं और लोग बेघर होकर ठंड में ठिठुर रहे हैं, जबकि सरकार अब तक राहत पैकेज का वितरण तक नहीं कर पाई।
जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में हिमाचल को आपदा राहत के लिए 5500 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं, लेकिन राज्य सरकार अब तक उसका दसवां हिस्सा भी खर्च नहीं कर सकी। मुख्यमंत्री ने 10 जुलाई को घोषणा की थी कि प्रभावितों को घर बनाने के लिए 7 लाख रुपए दिए जाएंगे, लेकिन अब तक किसी को एक रुपया भी नहीं मिला। उन्होंने कहा कि हर बार राज्य सरकार अपनी विफलता का ठीकरा केंद्र पर फोड़ती है, जबकि केंद्र सरकार नियमों के तहत लगातार आर्थिक सहायता दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में 1500 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की घोषणा की गई है, जो सीधे आपदा प्रभावितों की राहत के लिए है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में केंद्र द्वारा की गई हर घोषणा पूरी होती है — “मोदी की गारंटी का अर्थ है वादे की पूर्ति।” हिमाचल को उसका हर अधिकार और पाई-पाई मिलेगी, बशर्ते राज्य सरकार प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करे। उन्होंने याद दिलाया कि हिमाचल को विशेष राज्य का दर्जा भी नरेंद्र मोदी सरकार ने दिया था, जिसे पहले यूपीए सरकार ने छीन लिया था। इसी दर्जे की वजह से राज्य को परियोजनाओं में केवल 10% खर्च वहन करना पड़ता है, जबकि 90% खर्च केंद्र सरकार उठाती है।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि “केंद्र तो अपना काम कर रही है, लेकिन राज्य सरकार क्या कर रही है? क्या आपदा प्रभावितों को राज्य सरकार अपने संसाधनों से कोई राहत नहीं देगी?” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विधानसभा में खुद स्वीकार किया कि अब तक 5500 करोड़ की सहायता में से केवल 300 करोड़ रुपए से कम राशि ही खर्च की गई है। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि बाकी धनराशि कहां गई और अब तक एक भी परिवार को घर बनाने के लिए सहायता क्यों नहीं मिली।
एचआरटीसी में अनियमितताओं को लेकर जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ड्राइवर और कंडक्टरों को ही बलि का बकरा बना रही है। “कभी राहुल गांधी का वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई होती है, कभी बस खराब होने या सीट टूटने पर ड्राइवर-कंडक्टर पर ही गाज गिरती है,” उन्होंने कहा। जयराम ठाकुर ने सरकार से मांग की कि वह दूसरों पर दोषारोपण करने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझे और आपदा प्रभावितों को वास्तविक राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाए।


