पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश में बढ़ते चिट्टा संकट और निजी पुनर्वास केंद्रों की अव्यवस्था को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ सरकार की लड़ाई केवल हैडलाइन मैनेजमेंट और इवेंट आधारित गतिविधियों तक सीमित होकर रह गई है, जबकि स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि ताजा रिपोर्टों के अनुसार शिमला जिला की 412 पंचायतों में से 265 पंचायतें नशे की चपेट में हैं, जिनमें 145 बेहद संवेदनशील श्रेणी में रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि चिट्टे ने कई परिवारों को तोड़ दिया है—हाल ही में तीन पीढ़ियों के नशे में बर्बाद होने का मामला सामने आया, जबकि कांगड़ा में एक मां नशा खरीदने के कारण जेल पहुंच गई। ऐसे घटनाक्रम बेहद पीड़ादायक हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह नशा निवारण केंद्र में मरीज की पिटाई के बाद हुई मौत ने पुनर्वास केंद्रों की कार्यप्रणाली और सरकार की गंभीरता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अनेक निजी पुनर्वास केंद्रों में नशा छुड़ाने के नाम पर हिंसा और अत्याचार की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें कई मौतें भी हो चुकी हैं। प्रदेश में 102 पंजीकृत निजी पुनर्वास केंद्रों में से 40 को अनियमितताओं के चलते बंद किया गया है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निजी केंद्रों की बढ़ती अराजकता का कारण सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नशामुक्ति के लिए पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। प्रदेश के किसी भी मेडिकल कॉलेज में नशे के उपचार के लिए अलग डेडीकेटेड वार्ड नहीं है। मनोचिकित्सा विभाग ही इन मामलों को संभालता है, परंतु सरकार ने इन विभागों में बेड क्षमता तक नहीं बढ़ाई। उन्होंने कहा कि सरकारी सुविधाओं के अभाव में लोगों को निजी केंद्रों में प्रति माह 25 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं, जो हर परिवार के बस की बात नहीं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि नशे के खिलाफ जंग समाज और सरकार दोनों के संयुक्त प्रयास से ही जीती जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब माताएँ खुद अपने बच्चों को पुलिस के सामने सरेंडर कर रही हैं, तब सरकार की भूमिका मजबूत और स्पष्ट होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में सरकार केवल सुर्खियाँ बटोरने में व्यस्त है, जबकि नशा रक्तबीज की तरह प्रदेश के हर हिस्से में फैल रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि नशा निवारण के लिए सरकारी क्षेत्र में डेडीकेटेड वार्ड, पर्याप्त बेड, विशेषज्ञ सेवाएँ और प्रभावी उपचार सुविधाएं तत्काल उपलब्ध करवाई जाएँ, ताकि नशे से बाहर निकलने की इच्छा रखने वाले युवाओं को सुरक्षित, वैज्ञानिक और मानवीय उपचार मिल सके।


