जिला शिमला में नशे, खासकर चिट्टा (हेरोइन) के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए प्रशासन ने व्यापक स्तर पर विशेष जन-जागरूकता अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि यह अभियान जिले की सभी 441 पंचायतों में चलाया जाएगा और इसका उद्देश्य हर गांव तक नशा विरोधी संदेश पहुंचाना है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित बैठक में उपायुक्त ने कहा कि नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि पूरे समाज की है। इसलिए पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर महिला मंडल, युवक मंडल, स्वयं सहायता समूह और शैक्षणिक संस्थानों तक सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। युवाओं को नशे के दुष्परिणाम समझाकर उन्हें खेल, शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग संयुक्त रूप से गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। अभियान के दौरान शपथ ग्रहण, रैलियां, खेल आयोजन, नुक्कड़ नाटक और संवाद कार्यक्रम जैसे विभिन्न माध्यमों से संदेश दिया जाएगा।
इसी दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह ने बताया कि जिला पुलिस नशा तस्करी पर “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। वर्ष 2026 में अब तक एनडीपीएस एक्ट के तहत 159 मामले दर्ज कर 337 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कई बड़े तस्कर और अंतर-राज्यीय नेटवर्क भी शामिल हैं, जिन्हें ध्वस्त किया गया है।
पुलिस ने इस दौरान भारी मात्रा में हेरोइन, चरस, अफीम, मेथामफेटामाइन और अन्य नशीले पदार्थ बरामद किए हैं। साथ ही नशा तस्करी से अर्जित 1.13 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी फ्रीज की गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि PIT-NDPS के तहत आदतन अपराधियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि 441 पंचायतों तक पहुंचने वाला यह अभियान नशे के खिलाफ जन-आंदोलन का रूप लेगा और जिला शिमला को नशा मुक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।



