किन्नौर: कडू की खेती व संरक्षण पर किसानों को प्रशिक्षण

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जिला किन्नौर के निचार क्षेत्र में औषधीय पौधे कडू की खेती, संरक्षण और विपणन के माध्यम से आजीविका सुधार को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम वन मंडल किन्नौर के अंतर्गत वन परिक्षेत्र निचार में हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान शिमला द्वारा जाईका जड़ी-बूटी सेल हिमाचल प्रदेश वन विभाग के सहयोग से संचालित परियोजना के तहत आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में निगानी और निचार क्षेत्र के सामान्य हित समूहों, महिला समूहों तथा फील्ड स्टाफ सहित कुल 55 प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों को कडू की वैज्ञानिक खेती, संरक्षण तकनीक, हैंडहोल्डिंग सपोर्ट और विपणन कौशल से जोड़ना था, ताकि वे औषधीय पौधों की खेती से बेहतर आजीविका अर्जित कर सकें।

हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान के प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. जोगिंदर सिंह चौहान ने बताया कि जाईका परियोजना के तकनीकी सहयोग से स्थानीय समूह कडू की खेती कर रहे हैं और उन्हें नियमित रूप से मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने मिशन लाइफ के तहत ऊर्जा बचत और प्लास्टिक उपयोग कम करने जैसे पर्यावरण संरक्षण विषयों पर भी जानकारी दी।

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप शर्मा ने औषधीय पौधों के वैज्ञानिक दोहन और संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अनियंत्रित दोहन के कारण कई प्रजातियां संकट में हैं। उन्होंने कडू की खेती की तकनीक, मैक्रोप्रोलिफरेशन विधि और उपयुक्त भूमि चयन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. रणजीत कुमार ने किन्नौर की जैव विविधता और संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों पर प्रस्तुति दी, जबकि जाइका वानिकी परियोजना के प्रतिनिधि सीएम शर्मा ने किसानों के साथ निरंतर सहयोग का आश्वासन दिया। अधिकारियों ने बताया कि आगामी दिनों में फील्ड विजिट के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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