फिर आई दिवाली – डॉ. कमल के. प्यासा

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डॉ. कमल के. प्यासा – जीरकपुर

खिली फुलझड़ी, उड़ी हवाई,

हुए धमाके, दीप जले।

घर-आँगन चहके,

खूब लहर बधाई आई…!

खिली फुलझड़ी, उड़ी हवाई,

खुशियाँ बाँटें लिए मिठाई।

सजे फूलों ने महक बरसाई,

झिलमिल-झिलमिल करे रौशनी,

माता लक्ष्मी खुद आयीं…!

खिली फुलझड़ी, उड़ी हवाई,

चहूँ ओर दीप जले।

कहीं गूँजी देखो शहनाई,

कैसी रीत ये दुनियादारी,

मस्त-मौला सब खुशी मनाएँ…!

खिली फुलझड़ी, उड़ी हवाई,

क्या, कैसी होगी दिवाली?

बुझे चिराग जहाँ घरों के,

आहें भरते, याद वे करते,

अब के कैसी आई दिवाली…?

खिली फुलझड़ी, उड़ी हवाई।

ज़हर बेचते मौत के सौदागर – डॉ. कमल के.प्यासा

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