कृषि सचिव सी. पालरासू की अध्यक्षता में आज कृषि निदेशालय, बालूगंज में राजीव गांधी प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजना की प्रगति, किसानों के डिजिटलीकरण, उत्पादों के विपणन और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
कृषि सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों का ब्लॉक स्तर पर आधार आधारित डाटा तैयार कर मैपिंग की जाए, ताकि लाभार्थियों का अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। उन्होंने प्राकृतिक खेती किसानों को हिम परिवार रजिस्टर से जोड़ने की प्रक्रिया में तेजी लाने को भी कहा।
पालरासू ने प्राकृतिक खेती उत्पादों की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और बाजार उपलब्धता को योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इस दिशा में ठोस रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को बेहतर बाजार और पहचान मिलने से किसानों की आय में वृद्धि होगी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों की भूमि, फसल, उत्पादन, खरीद और भुगतान जैसी जानकारियों को एकीकृत डिजिटल पोर्टल पर लाने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे योजना में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में वर्तमान में 2.52 लाख से अधिक किसान 44,138 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार गेहूं, मक्का, हल्दी, पांगी घाटी के जौ और अदरक जैसी फसलों की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कर रही है।
इस दौरान कृषि विभाग के अधिकारियों ने योजना की उपलब्धियों, वर्तमान प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुति दी।



