प्रदेश में जनसुविधा, सुशासन और प्रशासनिक दक्षता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक उच्चस्तरीय आयोग का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी करेंगे। यह आयोग राज्य भर में मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की गहराई से समीक्षा करेगा, जिसमें जिलों, उप-मंडलों, तहसीलों, उप-तहसीलों, विकास खंडों और अन्य विभागीय मंडलों की वर्तमान स्थिति का आकलन शामिल है।आयोग की इस टीम में अधिवक्ता विशाल पंवर और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, जबकि निदेशक भू-अभिलेख, हिमाचल प्रदेश इसके सदस्य सचिव का कार्यभार संभालेंगे। इसके अलावा, राजस्व, वित्त, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, वन, लोक निर्माण, जल शक्ति और सामान्य प्रशासन विभागों के प्रशासनिक सचिव आवश्यकतानुसार ‘विशेष आमंत्रित’ (Special Invitee) के रूप में विभागों के बीच समन्वय और विशेषज्ञ सुझाव सुनिश्चित करेंगे। आयोग नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन, मौजूदा इकाइयों के विलय या विभाजन की आवश्यकता का आकलन करते समय जनसंख्या, भौगोलिक दूरियों, पहुंच और जनसुविधा को मुख्य आधार बनाएगा।
आयोग यह भी सुनिश्चित करेगा कि उसकी सिफारिशों से राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और कार्यालयों का कामकाज अधिक सुव्यवस्थित हो सके। अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने से पहले आयोग स्थानीय जनप्रतिनिधियों, संबंधित विभागों और मुख्य हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श करेगा। शिमला में स्थित मुख्यालय से कार्य करने वाले इस आयोग को राजस्व विभाग और संबंधित जिलों के उपायुक्तों द्वारा आवश्यक रिकॉर्ड, आंकड़े और प्रशासनिक सहायता प्रदान की जाएगी, और यह अधिसूचना जारी होने की तिथि से छह महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट और विशिष्ट सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगा।


