शिमला जिले की मेहली ग्राम पंचायत को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत मॉडल सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यह निर्णय उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक में लिया गया। पहले चरण में जिले की 10 पंचायतों—त्याल, छकड़ैल, दत्त नगर, कितबाड़ी, परहेच, शिंगला, सराहन, कुमारसैन, बौंडा और मेहली—का चयन किया गया था, जिनमें से केवल मेहली पंचायत ही निर्धारित समय सीमा तक सभी औपचारिकताएं पूरी कर पाई। इस उपलब्धि के चलते मेहली को एक करोड़ रुपये का पुरस्कार मिलेगा।
जिले में योजना की प्रगति अभी सीमित रही है। अब तक कुल 657 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 231 में सोलर इंस्टॉलेशन पूरा हो चुका है, जिससे 803 किलोवाट सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता विकसित होगी। इन 231 परियोजनाओं का निरीक्षण भी पूरा हो चुका है और 204 लाभार्थियों को सब्सिडी प्रदान की जा चुकी है। उपायुक्त ने योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा अपनाने से परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो सकते हैं। साथ ही पंचायतों को प्रत्येक सोलर रूफटॉप स्थापना पर 1,000 रुपये का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
इस योजना के तहत उस पंचायत को मॉडल सोलर विलेज चुना जाता है जहां सबसे अधिक रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित होते हैं, और उसे एक करोड़ रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। योजना को केंद्र सरकार ने 29 फरवरी 2024 को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य घरों को अपनी बिजली स्वयं उत्पन्न करने में सक्षम बनाना और सौर ऊर्जा क्षमता बढ़ाना है। इसके तहत 2 किलोवाट तक 60 प्रतिशत और 3 किलोवाट तक 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है, जिसमें अधिकतम लगभग 85 हजार रुपये की सहायता शामिल है।
योजना का संचालन हिमऊर्जा और राज्य विद्युत विभाग द्वारा किया जा रहा है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिसके बाद विभाग की मंजूरी मिलने पर उपभोक्ता वेंडर का चयन कर सोलर पैनल स्थापित कराता है। ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम से न केवल बिजली बिल में कमी आती है, बल्कि छत की खाली जगह का बेहतर उपयोग होता है और प्रतिदिन 1 किलोवाट प्लांट से लगभग 3 से 4 यूनिट बिजली का उत्पादन भी संभव है।



