ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के कॉन्फ्रेंस हॉल में कीकली चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित एक गरिमामय साहित्यिक समारोह में धर्म पाल भारद्वाज की दो बहुप्रतीक्षित काव्य पुस्तकों—पहाड़ी काव्य संग्रह ‘शीलै दि दौ’ (ठंडी घाटी में धूप) और हिंदी काव्य संग्रह ‘देवदार सोचते हैं’—का लोकार्पण हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि, प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. ओम प्रकाश सारस्वत ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि ‘शीलै दि दौ’ जैसी कृतियां हमारी लुप्त होती पहाड़ी बोलियों को सहेजने और संवारने में एक मजबूत स्तंभ का काम करेंगी। इस किताब के हर एक गीत को डॉ. गोपाल कृष्ण भारद्वाज ने अपने जादुई सुरों से जीवंत किया है, और पाठकों की सुविधा के लिए इसमें सुंदर हिंदी अनुवाद भी जोड़ा गया है। वहीं, हिंदी में रचित दूसरी पुस्तक ‘देवदार सोचते हैं’ के शुरुआती गीतों को भी डॉ. गोपाल के ही सुर मिले हैं। डॉ. सारस्वत ने इस सफर में धर्म पाल जी और सर्वेश जी के शुरुआती दौर से रहे अटूट सहयोग को भी विशेष रूप से सराहा।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विशिष्ट अतिथि, जाने-माने साहित्यकार सुदर्शन वशिष्ठ ने मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल की माटी और अपनी मातृभाषा के संरक्षण के लिए ऐसे प्रयास ही हमारी असली सांस्कृतिक पूंजी हैं। धर्म पाल जी की इन पहली प्रकाशित रचनाओं पर विश्वास जताते हुए उन्होंने कहा कि जब उनके लिखे शब्दों को डॉ. गोपाल भारद्वाज के गायन का साथ मिलता है, तो वे सीधे दिल में उतर जाते हैं। समारोह का एक और बड़ा आकर्षण रहा बहुप्रतीक्षित युगल गीत “धान माता चतुर्भुज, कोटगढ़ वाली” के ऑडियो का विमोचन, जिसे मंदिर के गूर संजीव भारद्वाज ने लॉन्च किया। डॉ. गोपाल भारद्वाज और कु. चारू शर्मा के सुरों से सजा यह मनमोहक गीत शोघी स्थित सुरेंद्र शर्मा के ऑडियो स्टूडियो में तैयार किया गया है।
पुस्तकों की गहराई पर प्रकाश डालते हुए कुमारसैन के प्रख्यात लेखक डॉ. हिमेन्द्र बाली ने कहा कि सतलुज घाटी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है और अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी यह काव्य रचनाएं इस विरासत में एक नया और महकता फूल जोड़ती हैं। इस साहित्यिक मंथन को आगे बढ़ाते हुए ओम प्रकाश शर्मा, डॉ. कौशल्या ठाकुर, उमा ठाकुर नद्यैक और हितेंद्र शर्मा ने अपने सारगर्भित शोध पत्र प्रस्तुत किए। साथ ही, प्रो. पी.के. आहलुवालिया, पं. सुमन चंद उपाध्याय, सर्वेश शर्मा, डॉ. नितिन व्यास, दिव्या भारद्वाज और शीतल शर्मा व्यास ने भी अपने अनमोल विचार साझा किए।
गेयटी थियेटर के सभागार में सर्वेश शर्मा, ओ.पी. शर्मा, संगीता सारस्वत, उमा ठाकुर नद्यैक, शीतल शर्मा व्यास सहित प्रदेश के कोने-कोने से आए कई गणमान्य लोग और साहित्यप्रेमी साक्षी बने। इस भव्य आयोजन और इसके व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए मीडिया पार्टनर ‘हिमाचल टुनाइट’ (Himachal Tonite) और ‘नेशनल मीडिया काउंसिल WICCI’ का सहयोग बेहद सराहनीय रहा, जिसके लिए आयोजकों ने विशेष आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के अंत में लेखक धर्म पाल भारद्वाज ने इस साहित्यिक संध्या को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए सभी आगत अतिथियों, मीडिया कर्मियों और प्रबुद्ध जनों का हृदय से धन्यवाद किया।
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