उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आज आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिले में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
बैठक में निर्णय हुआ कि किसी भी सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये की एक्सग्रेशिया राशि 15 दिनों के भीतर प्रभावित परिवार को जारी करनी होगी। इसके लिए संबंधित क्षेत्र के एसडीएम को पूरी जिम्मेदारी दी गई है। शिमला के अस्पतालों में रैफर होकर आने वाले घायलों को वित्तीय एवं अन्य सहायता देने के लिए एसडीएम शहरी को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रभावित व्यक्ति सीधे उनके कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
अब जिला स्तर की सड़क सुरक्षा समिति के साथ-साथ उपमंडल स्तर पर भी एसडीएम के नेतृत्व में समिति सक्रिय होगी। इसमें सभी एक्सईन, डीएसपी और अन्य हितधारक शामिल होंगे। यह समिति लोगों को यातायात नियमों, सड़क दुर्घटनाओं से बचाव और गोल्डन आवर्स में मदद प्रदान करने के लिए जागरूक करेगी।
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह (1–31 जनवरी 2026) के तहत जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। इसमें सड़क सुरक्षा शपथ, विशेष निरीक्षण अभियान, स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता कार्यक्रम, नशे में वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट पालन, लेन अनुशासन, नुक्कड़ नाटक और स्वयंसेवकों की भागीदारी जैसी गतिविधियां शामिल हैं। गुड समैरिटन प्रोत्साहन योजना के तहत सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद करने के लिए आम लोगों को प्रेरित किया जाएगा।
सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े:
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वर्ष 2025 में शिमला जिले में 268 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 102 मौतें और 436 घायल हुए।
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जिला में औसतन हर तीन दुर्घटनाओं में एक मौत दर्ज हुई।
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प्रमुख कारणों में ओवरस्पीड, ओवरटेकिंग, शराब पीकर वाहन चलाना और गलत लेन पर वाहन चलाना शामिल हैं।
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शहरी क्षेत्रों में 74 और ग्रामीण क्षेत्रों में 194 दुर्घटनाएं हुईं।


