राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं मध्यस्थता और सुलह परियोजना समिति के मार्गदर्शन में जिला शिमला के अधीनस्थ न्यायालयों में ‘मध्यस्थता राष्ट्र 2.0 अभियान’ चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी सहमति एवं मध्यस्थता के माध्यम से शीघ्र एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) शिमला के सचिव उमेश वर्मा ने बताया कि इस अभियान के तहत विभिन्न प्रकार के विवादों का निपटारा किया जाएगा, जिनमें वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, मोटर वाहन चालान मामले, घरेलू हिंसा के प्रकरण, चेक बाउंस मामले, वाणिज्यिक एवं सेवा संबंधी विवाद, समझौता योग्य आपराधिक मामले, उपभोक्ता विवाद, ऋण वसूली के मामले, विभाजन एवं बेदखली से जुड़े मुकदमे, भूमि अधिग्रहण प्रकरण सहित अन्य उपयुक्त दीवानी मामले शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यस्थता विवादों के समाधान की एक प्रभावी एवं वैकल्पिक प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षित मध्यस्थ की सहायता से पक्षकार आपसी सहमति से विवाद का निपटारा करते हैं। यह प्रक्रिया गोपनीय, सरल, लचीली, कम खर्चीली होने के साथ-साथ त्वरित न्याय प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम भी है।
उमेश वर्मा ने जिला के सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता प्रक्रिया को अपनाएं।



