अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच द्वारा ऐतिहासिक गेयटी थिएटर सभागार में “युद्ध और श्रम” विषय पर केंद्रित संवाद एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विचारोत्तेजक कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों और प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रम, सृजन और युद्ध के विविध आयामों पर गंभीर मंथन किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग में उप पुलिस महानिदेशक एवं साहित्य अनुरागी सौम्या सांबशिवन रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “विघटित होते हुए जीवन मूल्य ही युद्ध का कारण बनते हैं।” उन्होंने साहित्य और श्रम को सृजनात्मक शक्ति बताते हुए कहा कि कलम और श्रमिक दोनों ही अपने-अपने स्तर पर शांति और निर्माण के लिए कार्य करते हैं। उन्होंने युद्ध की विभीषिका पर ऐतिहासिक संदर्भों और साहित्यिक उदाहरणों के माध्यम से अपनी बात रखी तथा एक महिला मजदूर से जुड़े प्रेरक संस्मरण को साझा करते हुए श्रमिकों के आत्मसम्मान और सादगी को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
विशेष अतिथि पूर्व एचएएस अधिकारी डी.के. मांटा ने अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 1889 में हुई थी और भारत में पहली बार यह 1923 में मद्रास में आयोजित किया गया था। उन्होंने श्रम कानूनों और मजदूर हित में संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख भी किया।
प्रोफेसर इंदर सिंह ठाकुर ने हिमालय साहित्य संस्कृति एवं पर्यावरण मंच की सराहना करते हुए कहा कि इस मंच ने साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है तथा नवोदित रचनाकारों को सशक्त मंच प्रदान किया है। वहीं कवयित्री एवं आलोचक ममता जयंत ने कहा कि युद्ध विखंडन का प्रतीक है, जबकि श्रम सृजन का आधार है। उन्होंने श्रमिक जीवन की वास्तविकताओं पर प्रकाश डालते हुए कई प्रभावशाली कविताओं का पाठ भी किया।
कार्यक्रम का संचालन लेखिका एवं कवयित्री दीप्ति सारस्वत ने प्रभावशाली ढंग से किया। मंच के अध्यक्ष एस. आर. हरनोट ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए आयोजन को सफल बनाने में भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा गेयटी प्रशासन के सहयोग के लिए धन्यवाद प्रकट किया।
इस अवसर पर सोलन, मंडी, धर्मशाला, सिरमौर और शिमला सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए अनेक साहित्यकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अनेक कवियों और लेखकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रम और युद्ध के विषय को सशक्त अभिव्यक्ति दी।
From Poetry to Presidential Wisdom: DPS Students Shine at Rashtrapati Niwas



