Tag: रवींद्र कुमार शर्मा

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वो भी क्या दिन थे जब हम ऐसे गांव में थे रहते – रवींद्र कुमार शर्मा

रवींद्र कुमार शर्मा - घुमारवीं वो भी क्या दिन थे जब हम ऐसे गांव में थे रहते जहां रिश्ता लगा कर थे सब को बुलाते कोई बंदिश...

आ गया बसंत ऋतुओं का सरताज – रवींद्र कुमार शर्मा

आ गया बसंत ऋतुओं का सरताजडाली डाली फूल लगे हैं खिलनेप्रेम रस नस नस में है बहने लगाआतुर है सजनी साजन से मिलने भंवरों की...

कुचल दिया भरोसा ले गया विश्वास निकाल – रवींद्र कुमार शर्मा

सुना था शहर में मिलता है फसल का अच्छा दामयही सोच कर निकल पड़ा गांव से एक किसानदो घंटे की उतराई सिर पर बेचने...

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