उपायुक्त अनुपम कश्यप ने आज जिला क्षय रोग उन्मूलन समिति की बैठक में टीबी मरीजों के इलाज में सहायक उपायों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जिले में टीबी से ग्रसित मरीजों की न्यूट्रिशन किट में स्थानीय उत्पादों को शामिल करने के लिए विकल्प तलाशे जाएंगे। कश्यप ने बताया कि जिले में कई स्वयं सहायता समूह पौष्टिक और औषधीय गुणों से भरपूर उत्पाद बना रहे हैं, जिनका सेवन टीबी मरीजों के उपचार में मदद कर सकता है।
बैठक के दौरान, उपायुक्त ने टीबी मुक्त भारत अभियान, हैंड हेल्ड एक्स-रे, निक्षय मित्र सहयोग, और अन्य संबंधित पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जिले की 313 ग्राम पंचायतों में टीबी जागरूकता अभियान चलाया गया है, जिसमें टीबी से संबंधित योजनाओं की जानकारी पंचायत स्तर पर दी गई।
उपायुक्त ने कहा कि लोग कई गंभीर बीमारियों से ग्रसित होते हैं, लेकिन अस्पताल जाने में हिचकिचाते हैं, खासकर टीबी और नशे से ग्रस्त व्यक्तियों के मामले में। उन्होंने सामुदायिक सहयोग की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह हमारी प्राथमिकता है कि लोग अपने आसपास के समुदायों को स्वस्थ बनाने के लिए जागरूक करें, ताकि जिले में एक स्वस्थ सामाजिक संरचना बने।
उपायुक्त ने आगे बताया कि 7 दिसंबर 2024 से जुलाई 2025 तक 183,397 लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें से अब तक 120,396 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जो कि 66% है। इसके अतिरिक्त, जनवरी से जुलाई तक 1301 के लक्ष्य में से 1226 को पूरा किया गया है, और विभिन्न स्वास्थ्य परीक्षणों के लिए निर्धारित लक्ष्यों में भी सफलता प्राप्त की गई है।
टीबी मुक्त शिमला अभियान के तहत एक और बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी संबंधित विभागों और सामाजिक हितधारकों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद एक व्यापक योजना तैयार की जाएगी, जिससे जिले को टीबी मुक्त बनाने का प्रयास और तेज होगा।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद, और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।