हिमाचल में शिक्षा और खेलों को मिलेगा समान प्रोत्साहन: 68वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों में प्रदेश को 33 पदक

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हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिमला स्थित राजकीय आदर्श कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय पोर्टमोर में आयोजित “68वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों” के विजेता खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। हिमाचल स्कूल खेल संघ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री ने पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया और शिक्षा एवं खेलों के क्षेत्र में राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश में छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ-साथ खेलों को भी समान रूप से बढ़ावा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा राज्य सरकार की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी जरूरी संसाधन और नीतियां लागू की जा रही हैं। खेलों को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए उन्होंने कहा कि शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेलों को स्कूल शिक्षा के अभिन्न हिस्से के रूप में शामिल किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 68वें राष्ट्रीय स्कूल खेलों में हिमाचल प्रदेश के कुल 718 खिलाड़ियों ने भाग लिया, जिनमें U19 छात्र वर्ग में 199, U19 छात्रा वर्ग में 167, U17 छात्र वर्ग में 173 और U17 छात्रा वर्ग में 179 खिलाड़ी शामिल थे। इस प्रतियोगिता में प्रदेश ने 3 स्वर्ण, 6 रजत और 24 कांस्य पदक जीतकर कुल 33 पदक हासिल किए, जो कि पिछले वर्षों के मुकाबले सबसे बेहतर प्रदर्शन है। वर्ष 2022 में जहां प्रदेश ने 20 पदक हासिल किए थे, वहीं 2023 में यह संख्या घटकर 18 रही, परंतु इस वर्ष यह बढ़कर 33 पहुंचना अत्यंत गौरव का विषय है।

शिक्षा मंत्री ने विशेष रूप से बॉक्सिंग और कुराश खेलों में हिमाचल के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की, जिनमें से प्रत्येक में 10-10 पदक अर्जित किए गए। स्वर्ण पदकों की बात करें तो U19 छात्र वर्ग में कुराश में एक, और छात्रा वर्ग में कुराश व कुश्ती में दो स्वर्ण पदक प्राप्त हुए। रजत पदक बॉक्सिंग, कुराश, कुश्ती और हैंडबॉल जैसे खेलों में प्राप्त हुए, जबकि कांस्य पदकों में बॉक्सिंग, जूडो, योगा, ताइक्वांडो और हॉकी जैसे खेलों में खिलाड़ियों ने राज्य का नाम रोशन किया।

राज्य सरकार द्वारा खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने बताया कि हिमाचल प्रदेश स्कूल स्पोर्ट्स एसोसिएशन को ₹1 करोड़ की स्पोर्ट्स ग्रांट दी गई है। साथ ही, खेल छात्रावासों में नए खेल संकाय शुरू किए गए हैं — जैसे संधोल में वॉलीबॉल के लिए 20 सीटें, जुब्बल में छात्राओं के लिए कबड्डी की 20 सीटें और बैडमिंटन की 15 सीटें शुरू की गई हैं। वर्तमान में प्रदेश में 9 खेल छात्रावास सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त, U14 और U19 आयु वर्ग की डाइट मनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है, तथा राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में इसे ₹400 तक किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश ने ASER रिपोर्ट में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जबकि पहले नेशनल असेसमेंट सर्वे में हिमाचल 21वें स्थान पर था। बोर्ड परीक्षा परिणामों में भी इस वर्ष 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

सम्मान समारोह में स्वर्ण पदक विजेताओं को ₹5000, रजत विजेताओं को ₹3000 और कांस्य पदक विजेताओं को ₹2000 की राशि, टोपी, प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो प्रदान किए गए। साथ ही खिलाड़ियों के प्रशिक्षकों और अध्यापकों को शॉल और टोपी से सम्मानित किया गया।

पोर्टमोर स्कूल की उन छात्राओं को भी सम्मानित किया गया जिन्होंने 12वीं बोर्ड परीक्षा में श्रेष्ठ परिणाम प्राप्त किए। सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाली छात्राओं को शिक्षा मंत्री ने अपनी ऐच्छिक निधि से ₹2000 की सम्मान राशि देने की घोषणा की। उन्होंने पोर्टमोर स्कूल को एक उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान बताते हुए कहा कि यह स्कूल न केवल शिक्षा में बल्कि सहशैक्षणिक गतिविधियों में भी प्रदेश का गौरव बढ़ा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कुमार कोहली ने शिक्षा मंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ खेलों को बढ़ावा देना विभाग की प्राथमिकता है। महासचिव हिमाचल स्कूल खेल संघ संतोष चौहान ने खेल गतिविधियों की विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यक्रम में निदेशक समग्र शिक्षा राजेश शर्मा, अतिरिक्त निदेशक बी.आर. शर्मा, संयुक्त निदेशक डॉ. जगदीश नेगी, विभिन्न जिलों के उपनिदेशक, पोर्टमोर स्कूल की प्रधानाचार्य राखी पंडित और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

यह समारोह न केवल विजेता खिलाड़ियों के सम्मान का अवसर रहा, बल्कि यह संदेश भी दिया कि शिक्षा और खेलों के संतुलन से ही भविष्य के नेतृत्व की नींव रखी जा सकती है।

 

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